न्यूज़लिंक हिंदी। चीन इन दिनों तेजी से बढ़ती श्वसन संबंधी बीमारी की ओर बढ़ रहा है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, यहां ‘मिस्टीरियस निमोनिया’ का जोखिम तेजी से बढ़ता जा रहा है, विशेषतौर पर छोटे बच्चे इसके अधिक शिकार हो रहे हैं। असल में कोरोना महामारी के बाद तीन साल में ऐसा पहली बार है जब चीन बिना प्रतिबंधों के सर्दी के मौसम में प्रवेश कर रहा है।
इसकी शुरुआत में ही पूरे देश में श्वसन संबंधी बीमारियों की लहर देखी जा रही है।छोटे बच्चों में सांस से संबंधित बीमारियों और निमोनिया के मामले रिपोर्ट हो रहे हैं। इसको लेकर विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने अलर्ट जारी करते हुए सभी देशों को सावधानी बरतते रहने की सलाह दी है।
भारत की तैयारियों पर बोले स्वास्थ्य-मंत्री
चीन में विशेषकर बच्चों में माइकोप्लाज्मा निमोनिया और इन्फ्लूएंजा फ्लू के मामलों में वृद्धि के मद्देनजर केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री मनसुख मंडाविया ने शनिवार को कहा, सरकार स्थिति पर नजर रख रही है और बचाव के लिए सभी आवश्यक कदम उठाए जा रहे है।
वैश्विक चिंता का कारण बने इस प्रकोप के बारे में पूछे जाने पर स्वास्थ्य मंत्री ने कहा, आईसीएमआर और स्वास्थ्य सेवा महानिदेशक चीन में निमोनिया के बढ़ते मामलों को देखते हुए भारत को इस तरह के जोखिमों से कैसे बचाया जा सकता है, इसपर गंभीरता से ध्यान दे रहे हैं।
क्या है ये बीमारी?
माइकोप्लाज्मा निमोनिया जिसे मिस्टीरियस निमोनिया कहा जा रहा है ये एक प्रकार के बैक्टीरिया के कारण होने वाली समस्या है, जो मुख्यरूप से बच्चों को अपना शिकार बनाती है। इसके कारण सूखी खांसी, बुखार और शारीरिक मेहनत करने पर सांस की तकलीफ हो सकती है। माइकोप्लाज्मा निमोनिया के बैक्टीरिया सभी मानव रोगजनकों में से सबसे अधिक प्रचलित हैं।
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माइकोप्लाज्मा निमोनिया स्कूल, कॉलेज परिसर और नर्सिंग होम जैसे भीड़-भाड़ वाले इलाकों में खांसने-छींकने से निकलने वाली ड्रॉपलेट्स के संपर्क से तेजी से फैलता है। पांच साल से कम आयु के बच्चों, बुजुर्गों, कमजोर प्रतिरक्षा वाले लोगों, फेफड़ों की बीमारी के शिकार, सिकल सेल एनीमिया वाले लोगों में इसका खतरा अधिक देखा जाता रहा है।
चीन में क्यों बढ़ रही ये बीमारी
पिछले कुछ दिनों से बढ़ती इस बीमारी के लिए चीन के राष्ट्रीय स्वास्थ्य आयोग के अधिकारियों ने कोविड-19 प्रतिबंध हटाने को जिम्मेदार ठहराया है। स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, इसी तरह की समस्या यूके में भी प्रतिबंधों के हटने के बाद देखी गई थी, इसे “लॉकडाउन एग्जिट वेव” नाम दिया गया है।
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यूनिवर्सिटी कॉलेज लंदन में जेनेटिक इंस्टीट्यूट के निदेशक फ्रेंकोइस बेलौक्स कहते हैं, चीन अपने लंबे लॉकडाउन के बाद पहली बार सर्दी के दिनों में प्रतिबंधों से मुक्त हुआ है। सख्त प्रतिबंधों के कारण यहां श्वसन जैसे रोगों के कारक वायरस का खतरा कम हो गया था। वर्तमान स्थिति को देखते हुए एक नए रोगजनक के उभरने को लेकर जो कयास लगाए जा रहे हैं उसकी कोई पुष्टि नहीं है।

