प्रदेश में कौशल विकास अब सिर्फ प्रशिक्षण ही कार्यक्रम नहीं, बल्कि रोजगार और आत्मनिर्भरता का बड़ा माध्यम भी बनता जा रहा है।
फिर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सरकार ने पिछले नौ वर्षों में करीब 14 लाख युवाओं को विभिन्न क्षेत्रों में कौशल प्रशिक्षण देकर उन्हें पूर्ण रोजगार और स्वरोजगार से जोड़ने की दिशा में बड़ा ही अभियान चलाया है।
और सरकार का दावा है कि इनमें से 7.50 लाख से अधिक युवाओं को रोजगार या स्वरोजगार के अवसर भी मिले हैं।
इसके साथ ही प्रदेश सरकार ने आईटी, इलेक्ट्रॉनिक्स, स्वास्थ्य सेवाएं, ऑटोमोबाइल, निर्माण, फैशन डिजाइनिंग, हॉस्पिटैलिटी, रिटेल और कृषि आधारित उद्योगों जैसे क्षेत्रों में युवाओं को मुख्य प्रशिक्षण दिया।
फिर बदलती औद्योगिक जरूरतों के मुताबिक, पाठ्यक्रमों को अपडेट भी किया गया, ताकि प्रशिक्षित युवा सीधे रोजगार बाजार की मांग के अनुरूप तैयार भी हो सकें।
इसके अलावा सरकार ने रोजगार उपलब्ध कराने के लिए बड़े स्तर पर रोजगार मेलों का आयोजन भी किया।
फिर पिछले नौ वर्षों में प्रदेशभर में आयोजित 188 वृहद रोजगार मेलों के जरिए ही करीब 4.40 लाख युवाओं को नौकरी मिली।
फिर इन मेलों में देश की कई बड़ी कंपनियों और औद्योगिक संस्थानों ने भाग लिया। फिर इससे स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर भी बढ़े और युवाओं का दूसरे राज्यों की ओर पलायन भी कम हुआ।
और इतना ही नहीं सरकार का फोकस केवल नौकरी तक सीमित नहीं है। स्वरोजगार और उद्यमिता को बढ़ावा देने के लिए भी युवाओं को प्रशिक्षण, वित्तीय सहायता और मार्केट लिंकिंग उपलब्ध भी कराई जा रही है।
फिर एमएसएमई, स्टार्टअप और स्थानीय उद्योगों से जुड़ने वाले युवाओं की संख्या लगातार बढ़ रही है।
और विशेषज्ञ मानते हैं कि देश की सबसे बड़ी युवा आबादी वाले राज्य उत्तर प्रदेश के लिए कौशल विकास ही आर्थिक विकास की सबसे बड़ी ताकत बन सकता है।
इसके साथ ही सरकार भी इसी रणनीति पर काम भी कर रही है। और कौशल, उद्योग और रोजगार के समन्वय के जरिए यूपी अब स्किल कैपिटल के रूप में ही अपनी पूर्ण पहचान मजबूत करने की दिशा में आगे भी बढ़ रहा है।