न्यूज़लिंक हिंन्दी। शनिवार को नवाज ने भारत संग बेहतर रिश्तों की बात करते हुए कारगिल की जंग को लेकर एक बड़ा कबूलनामा कर लिया है। नवाज ने लाहौर में कहा है कि उन्हें सन् 1999 में सत्ता से इसलिए बाहर फेंक दिया गया क्योंकि उन्होंने तत्कालीन सेना प्रमुख जनरल परवेज मुशर्रफ के कारगिल प्लान का समर्थन नहीं किया था।
नवाज ने पहली बार कबूल किया है कि उन्हें मुशर्रफ के कारगिल में खतरनाक प्लान के बारे में मालूम था। भारत और पाकिस्तान के बीच मई 1999 में कारगिल में संघर्ष की शुरुआत हुई थी। उस समय पाकिस्तान आर्मी के समर्थन से कुछ आतंकी जम्मू कश्मीर के द्रास सेक्टर में दाखिल हो गए थे। जुलाई में जाकर यह संघर्ष खत्म हो सका था।
नवाज ने अपनी पार्टी के सदस्यों को संबोधित करते हुए कहा, ‘मुझे बताया जाना चाहिए कि मुझे सन् 1993 और 1999 में क्यों बाहर कर दिया गया था। जब मैंने कारगिल योजना का विरोध करते हुए कहा था कि ऐसा नहीं होना चाहिए तो मुझे जनरल परवेज मुशर्रफ ने बाहर कर दिया था। और बाद में मैंने जो कहा वह सही साबित हुआ।
नवाज ने कहा कि उन्होंने इस मसले को सही तरह से संभाला था और मुशर्रफ से कहा था कि कारगिल में जंग नहीं होनी चाहिए। हालांकि नवाज ने पहले कहा था कि उन्हें मुशर्रफ के कारगिल के बारे में कोई जानकारी नहीं थी। नसीम जेहरा की किताब ‘फ्रॉम करगिल टू द कूप’ में भी लिखा गया है कि नवाज को कारगिल के हालातों की जानकारी बहुत बाद में उस समय मिली जब उन्होंने जानना चाहा कि आखिर वहां क्या हो रहा है।
कारगिल की जंग मई 1999 में तब हुई थी जब उसी साल भारत के तत्कालीन पीएम अटल बिहारी वाजपेयी नई दिल्ली से लाहौर तक गए थे। वह एक बस सेवा लॉन्च करने के तहत लाहौर गए थे। वाजपेयी के कदम को दोनों देशों के बीच अभूतपूर्व शांति का संकेत माना गया था।
फरवरी 1999 में लाहौर में शरीफ और वाजपेयी के बीच एक शिखर सम्मेलन के साथ उनकी यात्रा खत्म हुई थी। तब वाजपेयी ने कहा था कि शरीफ ने उनकी पीठ में छुरा भोंका है। जबकि कारगिल युद्ध के दौरान, शरीफ ने दावा किया था कि उन्हें कारगिल में युद्ध शुरू करने की अपनी सेना की कार्रवाई के बारे में जानकारी नहीं थी।

