UP News: 6 करोड़ लोग गरीबी रेखा से निकले बाहर, बिहार अब भी फिसड्डी, सरकार के 9 सालों के काम पर इस रिपोर्ट की मुहर

मोदी सरकार के 9 सालों में 24 करोड़ 82 लाख लोग गरीबी रेखा से बाहर निकल आए हैं। नीति आयोग की तरफ से जारी रिपोर्ट के मुताबिक, उत्तर प्रदेश में सबसे ज्यादा करीब 6 करोड़ लोग गरीबी रेखा से बाहर निकले हैं।

0
247

न्यूज़लिंक हिंदी। मोदी सरकार के 9 सालों में 24 करोड़ 82 लाख लोग गरीबी रेखा से बाहर निकल आए हैं। नीति आयोग की तरफ से जारी रिपोर्ट के मुताबिक, उत्तर प्रदेश में सबसे ज्यादा करीब 6 करोड़ लोग गरीबी रेखा से बाहर निकले हैं। गरीबी से बाहर निकलने वालों में टॉप 4 राज्यों में मध्य प्रदेश भी शामिल है। 2013-14 में भारत में गरीबी दर 29.17 फीसदी थी, जो 2022-23 में घटकर 11.28% रह गई। मोदी सरकार के 9 साल के कार्यकाल में गरीबी दर में 17.89 फीसदी की कमी आई है।

किस राज्य में सबसे ज्यादा गरीब हैं तो इसमें बिहार टॉप पर है। यहां पर 26.59 प्रतिशत आबादी गरीब है। इसके बाद झारखंड का नंबर है। राज्य में 23.34 प्रतिशत गरीब हैं। यूपी में 17.40 प्रतिशत।

ये भी पढ़े: पंजाब के CM भगवंत मान को जान से मारने की मिली धमकी, आतंकी पन्नू ने हमला करने के लिए गैंगस्टर्स को साथ आने को कहा

गरीबों को मिला योजनाओं का लाभ
नौ साल में इतनी बड़ी संख्या में लोगों के गरीबी रेखा से बाहर आने की बड़ी वजह सरकारी योजनाओं में लीकेज बंद होना है। इससे लाभार्थियों तक योजनाओं का लाभ सीधे पहुंचा। 2017 में प्रदेश में योगी सरकार आने के बाद प्रदेश में केंद्र की योजनाएं प्राथमिकता से लागू की गईं। लोगों को काफी संख्या में आवास मिले। 1.50 करोड़ से अधिक घरों तक मुफ्त में बिजली पहुंचाई गई। गरीब कल्याण की योजनाएं पूरे प्रदेश में प्रभावी ढंग से लागू की गईं।

बीमारू राज्य की श्रेणी से बाहर निकला यूपी
नीति आयोग के आंकड़ों के मुताबिक, उत्तर प्रदेश बीमारू राज्य की श्रेणी से बाहर आकर देश की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन रहा है। उत्तर प्रदेश में प्रति व्यक्ति आय दोगुनी हुई है। आंकड़ों के मुताबिक, कोविड-19 वैश्विक महामारी के कारण बीते 2-3 साल पूरे विश्व और देश में आर्थिक मंदी रही। इसके बावजूद प्रदेश की अर्थव्यवस्था की रफ्तार कायम रही।

बिहार में सबसे ज्यादा गरीब
किस राज्य में सबसे ज्यादा गरीब हैं तो इसमें बिहार टॉप पर है। यहां पर 26.59 प्रतिशत आबादी गरीब है। इसके बाद झारखंड का नंबर है। राज्य में 23.34 प्रतिशत गरीब हैं। यूपी में 17.40 प्रतिशत, एमपी में 15.01 प्रतिशत, छत्तीसगढ़ में 11.71 प्रतिशत, राजस्थान में 10.77 प्रतिशत गरीब हैं। केरल में सबसे कम गरीबी है। यहां पर .48 प्रतिशत गरीबी है। इसके बाद तमिलनाडु (1.48 प्रतिशत), तेलंगाना (3.76 प्रतिशत) और हिमाचल (1.88 प्रतिशत) का नंबर है।

ये भी पढ़े: Supreme Court: श्रीकृष्ण जन्मभूमि-शाही ईदगाह मस्जिद विवाद में बड़ा फैसला, सुप्रीम कोर्ट ने मस्जिद के सर्वे पर लगाई रोक

ऐसे तय होते हैं आंकड़े
नीति आयोग ने कहा कि राष्ट्रीय बहुआयामी गरीबी स्वास्थ्य, शिक्षा और जीवनस्तर के मोर्चे पर स्थिति को मापती है। यह 12 सतत विकास लक्ष्यों से संबद्ध संकेतकों के माध्यम से दर्शाए जाते हैं। इनमें पोषण, बाल और किशोर मृत्यु दर, मातृत्व स्वास्थ्य, स्कूली शिक्षा के वर्ष, स्कूल में उपस्थिति, खाना पकाने का ईंधन, स्वच्छता, पीने का पानी, बिजली, आवास, संपत्ति और बैंक खाते शामिल हैं। नीति आयोग का राष्ट्रीय बहुआयामी गरीबी सूचकांक (एमपीआई) गरीबी दर में गिरावट का आकलन करने के लिए ‘अलकायर फोस्टर पद्धति’ का उपयोग करता है। हालांकि, राष्ट्रीय एमपीआई में 12 संकेतक शामिल हैं जबकि वैश्विक एमपीआई में 10 संकेतक हैं।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here