न्यूज़लिंक हिंदी। सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को काशी के ज्ञानवापी मामले में बड़ा फैसला दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने मस्जिद परिसर में मौजूद पानी की टंकी (वुजुखाना) की सफाई कराने की अनुमति दे दी है। गौरतलब है कि इसी वुजुखाने में हिंदू पक्ष ने शिवलिंग होने का दावा किया है।
मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़, जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस मनोज मिश्रा की पीठ ने हिंदू पक्ष की याचिका पर यह निर्देश दिया। दरअसल हिंदू पक्ष ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर मस्जिद परिसर में भगवान की पूजा करने की अनुमति मांगी थी। साथ ही पानी के टैंक की सफाई की मांग की गई थी क्योंकि उस टैंक में मछलियां मरी पड़ीं थी। हिंदू पक्ष की याचिका का मस्जिद मैनेजमेंट कमेटी द्वारा विरोध नहीं किया गया।
दरअसल, उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से अदालत में पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल माधवी दीवान ने टंकी की सफाई की अनुमति मांगते हुए कहा था कि इसमें मरी हुई मछलियां पड़ी हैं। इसके बाद न्यायालय ने इसकी सफाई का निर्देश दिया। शीर्ष अदालत ने अपने आदेश में यह भी कहा कि मस्जिद के प्रबंधन निकाय अंजुमन इंतजामिया मस्जिद कमेटी ने वाराणसी की एक निचली अदालत में इसी तरह की याचिका दायर की है।
वाराणसी जिला अदालत ने पिछले साल 21 जुलाई को भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) को यह पता लगाने के लिए ‘विस्तृत वैज्ञानिक सर्वेक्षण’ करने का निर्देश दिया था कि काशी विश्वनाथ मंदिर के बगल में स्थित मस्जिद का निर्माण किसी मंदिर की पहले से मौजूद संरचना पर किया गया है या नहीं।
उच्चतम न्यायालय ने मस्जिद परिसर के वजूखाने को संरक्षित रखने का पहले आदेश दिया था जिसके कारण यह हिस्सा सर्वेक्षण का हिस्सा नहीं होगा। हिंदू वादियों ने इस स्थान पर ‘शिवलिंग’ होने का दावा किया है। हिंदू कार्यकर्ताओं का दावा है कि इस स्थान पर पहले एक मंदिर था और 17वीं शताब्दी में मुगल सम्राट औरंगजेब के आदेश पर इसे ध्वस्त कर दिया गया था।

