उत्तर प्रदेश में अब मानसून की सुस्त चाल ने सरकार की चिंता भी बढ़ा दी है।
फिर जून माह में प्रदेश के आधे से अधिक जिलों में सामान्य से काफी कम बारिश होने के बाद ही सूखे जैसे हालात भी बनने लगे हैं।
और फिर स्थिति की गंभीरता को देखते हुए भी मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश के बाद ही सभी विभागों को अलर्ट मोड में रहने और फिर हर परिस्थिति से निपटने के लिए अग्रिम तैयारी में भी जुट गए हैं।
साथ ही क्षेत्रीय मौसम विज्ञान केंद्र, लखनऊ के अनुसार एक जून से 24 जून तक प्रदेश के 75 में से 54 जिलों में सामान्य से कम बारिश भी दर्ज की गई है।
फिर इनमें 37 जिलों में वर्षा की कमी 60 से 99 प्रतिशत तक पहुंच गई है। और फिर सबसे चिंताजनक स्थिति कौशांबी की है।
जहां जून माह में एक बूंद भी बारिश नहीं हुई। और फिर 100 प्रतिशत वर्षा की कमी भी दर्ज की गई है।
साथ ही मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि अल-नीनो के प्रभाव के कारण इस बार मानसून की रफ्तार भी धीमी है।
और फिर सामान्य तौर पर 18 से 20 जून के बीच सक्रिय होने वाला मानसून 24 जून तक प्रदेश में प्रभावी नहीं हो सका।
फिर इसका सीधा असर धान, मक्का, अरहर और सब्जियों की खेती पर पड़ने की आशंका भी बनी हुई है।
फिर वहीँ पूर्वांचल और अवध के जिलों में हालात सबसे अधिक गंभीर भी बताए जा रहे हैं।
और फिर ऐसे में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने ही किसानों को समय पर बीज, उर्वरक, सिंचाई जल, बिजली और फसली ऋण उपलब्ध कराना ही सर्वोच्च प्राथमिकताएं तय करते हुए खरीफ अभियान को मिशन मोड में चलाने के मुख्य निर्देश भी दिए हैं।
फिर सभी जिलाधिकारियों से स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप कार्ययोजना तैयार रखने को भी कहा है।
और फिर संभावित सूखे की आशंका को देखते हुए सरकार ने आकस्मिक योजना भी तैयार की है।
इसके अलावा अंबेडकरनगर, अयोध्या, बाराबंकी, बस्ती, जौनपुर, लखनऊ, मिर्जापुर, प्रयागराज, वाराणसी, श्रावस्ती, सिद्धार्थनगर, सोनभद्र, झांसी, महोबा, पीलीभीत और फिर शामली समेत 37 जिलों में 60 से 99 प्रतिशत तक कम वर्षा भी दर्ज की गई है।
हालांकि आगरा, एटा, हाथरस और संभल में सामान्य से 60 प्रतिशत से अधिक बारिश भी दर्ज की गई है।
फिर जबकि मथुरा, मुजफ्फरनगर, फिरोजाबाद, बुलंदशहर और कन्नौज में भी सामान्य से अधिक भी वर्षा हुई है।