Gyanvapi Case: ज्ञानवापी परिसर में हो सकता है ASI सर्वे, जानिए पूरा मामला

इस आदेश के खिलाफ सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड और अंजुमन इंतेजामिया मसाजिद की ओर से इलाहाबाद हाई कोर्ट में अपील की गई, जिसे हाई कोर्ट ने खारिज करते हुए आदेश दिया कि मां श्रृंगार गौरी मुकदमे में दाखिल एएसआई सर्वे की रिपोर्ट इस मुकदमे में भी दाखिल की जाए।

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न्यूज़लिंक हिंदी, वाराणसी। ज्ञानवापी परिसर में फिर से ASI सर्वे हो सकता है। मंदिर पक्ष ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर सील पानी टंकी जहां शिवलिंग की आकृति मिलने का दावा मंदिर पक्ष करता है। एएसआई सर्वे की मांग को लेकर सुप्रीम कोर्ट में प्रार्थना पत्र दिया है।

जानकारी के लिए बता दे कि स्वयंभू विश्वेश्वर ज्योतिर्लिंग की ओर से पं. सोमनाथ व्यास व अन्य द्वारा दाखिल मुकदमा सिविल जज सीनियर डिवीजन फास्ट ट्रैक कोर्ट में लंबित है। पं. सोमनाथ व्यास की सात मार्च 2000 को मृत्यु होने के बाद मुकदमे में उनके स्थान पर पैरवी करने के लिए अदालत ने 11 अक्टूबर 2018 को पूर्व जिला शासकीय अधिवक्ता विजय शंकर रस्तोगी को वादमित्र नियुक्त किया था।

सिविल जज आशुतोष तिवारी ने आठ अप्रैल 2021 को उनकी अपील मंजूर कर ली और पुरातात्विक सर्वेक्षण कराने का आदेश दिया। इस आदेश के खिलाफ सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड और अंजुमन इंतेजामिया मसाजिद की ओर से इलाहाबाद हाई कोर्ट में अपील की गई, जिसे हाई कोर्ट ने खारिज करते हुए आदेश दिया कि मां श्रृंगार गौरी मुकदमे में दाखिल एएसआई सर्वे की रिपोर्ट इस मुकदमे में भी दाखिल की जाए।

सर्वे की मांग जरूर करेंगे
एएसआई की सर्वे सभी रिपोर्ट को पढ़ने के बाद वादी को लगता है कि ज्ञानवापी में और सर्वे होना चाहिए तो निचली अदालत इस पर आदेश दे सकती है। इस बारे में वाद मित्र विजय शंकर रस्तोगी ने कहा कि श्रृंगार गौरी मुकदमे में ज्ञानवापी के आराजी संख्या 9130 में ही सर्वे हुआ है, जबकि उनके मुकदमे में इसके साथ ही आराजी संख्या 9131 और 9132 में भी सर्वे का आदेश अदालत ने दिया है। इसमें ज्ञानवापी का विस्तृत क्षेत्र आता है। इसलिए वह सर्वे की मांग जरूर करेंगे।

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