लोहिया की जन्मस्थली में ही समाजवादी पार्टी को जीत का इंतजार,1996 से आम चुनावों में पार्टी को नहीं मिली सफलता

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न्यूज़लिंक हिंदी। जिन प्रख्यात समाजवादी डॉ. राम मनोहर लोहिया के सिद्धांतों से प्रेरित होकर समाजवादी पर्टी का गठन हुआ,उन्हीं की जन्मभूमि पर सपा को लोकसभा चुनाव में जीत का इंतजार है। पार्टी गठन के बाद हुए सात आम चुनावों में सपा चार बार दूसरे स्थान तक आई, लेकिन जीत नसीब नहीं हुई।

पूरी दुनिया में उनके समाजवादी आदर्श की गूंज हुई, लेकिन इन सबके बीच डॉ. लोहिया का नाम लेकर आगे बढ़ी समाजवादी पार्टी को अकबरपुर में ही आम चुनाव के सफर में एक भी जीत मयस्सर नहीं हो सकी। वर्ष 1992 में गठन के बाद सपा ने पहला आम चुनाव वर्ष 1996 में लड़ा। तब अकबरपुर सुरक्षित संसदीय सीट पर पार्टी ने अयोध्या जनपद के कद्दावर दलित नेता अवधेश प्रसाद को टिकट दिया।

डॉ. लोहिया की धरती पर सपा ने बड़े चेहरे को उतार कर मजबूत संदेश देने की कोशिश की। इस चुनाव के बाद हुए परिसीमन में जिले की इकलौती सीट अकबरपुर सुरक्षित से बदलकर सामान्य श्रेणी में आ गई। नाम भी अंबेडकरनगर हो गया। सामान्य सीट पर हुए पहले चुनाव में भी सपा को जीत नहीं मिली। शंखलाल मांझी बतौर सपा प्रत्याशी लगभग 2,36,751 मत के साथ बसपा के राकेश पांडेय से 22,736 वोटों से पिछड़ गए।

यह जरूर रहा कि इससे पहले के चुनाव परिणामों को शामिल किया जाए तो इस बार सबसे कम मत से सपा को हार मिली।डॉ. लोहिया वर्ष 1963 में फर्रुखाबाद सीट पर हुए लोकसभा उपचुनाव में करीब 58 हजार वोट से विजयी होकर सांसद बने थे। उनका जन्म 23 मार्च 1910 को अकबरपुर में हुआ था, जब वे ढाई वर्ष के थे तो माता चंदा का निधन हो गया। पालन पोषण परिवार की दाई सरयू देई ने किया।

पेशे से अध्यापक पिता हीरालाल उन्हें वर्ष 1918 में ही कांग्रेस के अहमदाबाद अधिवेशन में लेकर गए थे, जिसके बाद डॉ. लोहिया ने पीछे मुड़कर नहीं देखा। वे भारत छोड़ो आंदोलन में पहली बार 20 मई 1944 को गिरफ्तार हुए। राष्ट्रभक्ति उनमें इस कदर थी कि सरकार की कृपा पर पेरोल पर रिहा होने से इन्कार कर दिया था।

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