भारत ने विकसित किया दुनिया का सबसे घातक विस्फोटक,जो टीएनटी से 2.01 गुना ज्यादा घातक

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न्यूज़लिंक हिंदी। भारत ने SEBEX 2 नामक विस्फोटक तैयार कर इसका सफल परीक्षण भी मुख्य रूप से कर लिया है। इस विस्फोटक के बारे में इतना कहा जा सकता है कि यह परमाणु आधारित नहीं है, लेकिन इसकी विनाशकारी क्षमता बहुत अधिक है।

कोई विस्फोटक कितना घातक है, इसका आकलन टीएनटी के आधार पर किया जाता है। टीएनटी एक मानक है जिसके अनुसार तय होता है कि किसी विस्फोटक में कितनी तबाही करने की क्षमता है। इस पैमाने पर सेबेक्स 2 की क्षमता दोगुने से भी थोड़ा ज्यादा है।

भारत के सेबेक्स 2 का परफॉर्मेंस इतना हाई है कि यह दुनिया के सबसे शक्तिशाली गैर-परमाणु विस्फोटकों में से एक बन गया है। नौसेना ने सेबेक्स 2 का व्यापक परीक्षण करने के बाद इसके इस्तेमाल के लिए ओके कर दिया है। नई विधि से तैयार विस्फोटक सेबेक्स 2 की खासियत यह है कि यह बिना वजन बढ़ाए बम, तोपखाने के गोले और वॉरहेड्स की विनाशकारी शक्ति में जबर्दस्त वृद्धि के साथ क्रांति लाने में सक्षम है।

इसी वजह से इसकी पूरी दुनिया में मांग हो सकती है। यानी, भारत के लिए रक्षा उत्पादन के क्षेत्र में एक नया बाजार खुलने जा रहा है। दरअसल, दुनिया भर की ताकतें मौजूदा हथियार प्रणालियों को ज्यादा से ज्यादा घातक बनाने में जुटी हुई हैं।

अधिकारियों ने कहा, विस्फोटक के विकास से इस्तेमाल में आने वाले हथियारों और गोला-बारूद की क्षमता एवं दक्षता संयुक्त रूप से बढ़ेगी। उन्होंने कहा कि फाइनल सर्टिफिकेशन पिछले सप्ताह पूरा हो गया था। जैसा कि ऊपर बताया जा चुका है कि जितनी ज्यादा टीएनटी, विस्फोटक उतना ही घातक होता है।

भारत में अभी इस्तेमाल किया जा रहा सबसे शक्तिशाली पारंपरिक विस्फोटक ब्रह्मोस मिसाइल के वॉरहेड में इस्तेमाल हो रहा है। कोनॉमिक एक्सप्लोसिव्स लिमिटेड ने ‘मेक इन इंडिया’ पहल के तहत तेजी से पिघलने वाले विस्फोटक के कंपोजिशन के आधार पर सेबेक्स 2 को तैयार किया है।

यह कंपोजिशन ‘वॉरहेड्स की विनाशकारी क्षमता, हवा से गिरा जाने वाले बम, तोपखाने के गोले और अन्य युद्ध सामग्री की मारक क्षमता में बहुत इजाफा करेगी, जो लक्ष्यों को नुकसान पहुंचाने के लिए विस्फोट और विखंडन प्रभाव का उपयोग भी करते हैं।

नौसेना से सर्टिफाइड तीसरा विस्फोटक सिमेक्स 4 है, जो एक असंवेदनशील हथियार है जो मानक विस्फोटकों की तुलना में भंडारण, परिवहन और संचालन के लिए अधिक सुरक्षित भी है। नए फॉर्मूलेशन में अचानक विस्फोट की संभावना बहुत कम है और इसका उपयोग उन जगहों पर किया जा सकता है जहां सुरक्षा बेहद सर्वोपरि है।

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