दुनिया में अब विनाशक हथियार बनाने की रेस लगातार जारी है। खासकर पिछले कुछ सालों में बने युद्ध के माहौल ने इसे काफी तेजी से बढ़ाया भी गया है।
मिली जानकारी के अनुसार, कि सऊदी अरब भी बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रम पर काम कर रहा है। सैटेलाइट तस्वीरों के आधार पर आशंका जताई जा रही है कि सऊदी अरब बैलिस्टिक मिसाइलों का निर्माण कर रहा है।
हाल ही में जारी सैटेलाइट तस्वीरों से अनुमान भी लगाया गया है कि सऊदी अरब चुपचाप लंबी दूरी तक मार करने वाली मिसाइलों का निर्माण भी कर रहा है।
और आपको बता दें कि सऊदी अरब ने पहली बार 1980 के दशक में ईरान-इराक युद्ध के दौरान अपनी मिसाइल क्षमताओं को बढ़ाने के लिए लंबी दूरी की सतह से सतह पर मार करने वाली मिसाइलों की स्थापना भी की थी।
लेकिन उसके बाद सऊदी अरब ने अपने मिसाइल कार्यक्रम को किस रफ्तार से और किस दिशा में लगातार बढ़ाया है, उसके बारे में ज्यादा जानकारी नहीं है। खाड़ी देशों की हमेशा से एक बड़ी खासियत ये रही है कि वो हथियारों को लेकर अपनी शक्ति का खुलेआम प्रदर्शन भी नहीं करते हैं।
वो अपनी डिफेंस क्षमता को गुप्त रखने में विश्वास करते हैं और सऊदी अरब भी शायद ऐसा ही कर रहा है। इसके साथ ही मध्य सऊदी अरब के अल-नभानियाह शहर के पास एक अंडरग्राउंड मिसाइल बेस का निर्माण किया जा रहा है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि इसका निर्माण साल 2019 में शुरू हुआ था और 2024 की शुरुआत तक इसका काम लगभग पूरा हो चुका था। रिपोर्ट में ये भी कहा गया है कि 1980 के दशक के बाद शायद सऊदी अरब में बनाए जाने वाला ये पहला अंडरग्राउंड मिसाइल भी बेस है।
हिंज ने अनुमान लगाया है कि ये साइट एक मिसाइल बेस है। हिंज ने कहा है कि इस जगह पर प्रशासनिक भवन, अंडरग्राउंड परिसर और एंट्री सुरंग भी दिख रहे हैं।
ये भी बता दें कि सऊदी अरब की लंबी दूरी की मिसाइल क्षमताएं अत्यधिक गोपनीय बनी हुई हैं। लेकिन मोहम्मद बिन सलमान पहले साफ कर चुके हैं कि अगर ईरान परमाणु बम बनाता है तो सऊदी अरब के लिए परमाणु बम बनाना अनिवार्य हो जाएगा।
सऊदी अरब की छिपी हुई चाहत परमाणु बम बनाने की रही है। वहीं बैलिस्टिक मिसाइल क्षमता विकसित करने से वो अपनी डिफेंस शक्ति को काफी मजबूत भी कर सकता है।
सऊदी अरब ने साल 2014 में चीनी में बनी डोंगफेंग-3 बैलिस्टिक मिसाइलों के प्रदर्शन के साथ बड़े पैमाने पर सैन्य अभ्यास भी किया था, जिसमें पहली बार मिसाइलों का प्रदर्शन भी किया गया था।