जानिए भारत के किस गांव में रहते हैं सबसे ज्यादा बौने बच्चे, हैरान हो जायेंगे बौनेपन की वजह जानकर

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भारत में भी एक राज्य ऐसा भी है जहां लगभग 68.12% बच्चे बौनेपन के शिकार हैं। और साथ ही जून 2025 के पोषण ट्रैकर के आंकड़ों के अनुसार बौनेपन का कारण दीर्घकालिक या बार-बार होने वाला कुपोषण भी हो सकता है।

और फिर जिसका बच्चों के विकास पर गहरा प्रभाव पड़ता है। साथ ही संसद में प्रस्तुत विभिन्न दस्तावेजों के विश्लेषण के अनुसार ही 13 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के 63 जिलों में बच्चे सबसे ज्यादा बौनेपन का शिकार हैं।

इसके साथ ही महिला एवं बाल विकास मंत्रालय के जून 2025 के पोषण ट्रैकर पर आधारित आंकड़ों के अनुसार, बौनेपन के उच्चतम स्तर वाले सबसे अधिक प्रभावित जिलों में महाराष्ट्र का नंदुरबार , झारखंड का पश्चिमी सिंहभूम , उत्तर प्रदेश का चित्रकूट, मध्य प्रदेश का शिवपुरी और असम का बोंगाईगांव भी शामिल हैं।

इसके अलावा उत्तर प्रदेश इस सूची में सबसे ऊपर है, जहां 34 जिलों में बौनेपन का स्तर 50 प्रतिशत से अधिक है, इसके बाद मध्य प्रदेश, झारखंड, बिहार और असम का स्थान भी है।

और फिर महिला एवं बाल विकास मंत्रालय ने कई सवालों के जवाब में बताया कि आंगनवाड़ियों में 0-6 साल की उम्र के 8.19 करोड़ बच्चों में से 35.91 प्रतिशत बच्चे बौनेपन के शिकार हैं और 16.5 प्रतिशत कम वजन के हैं।

और फिर पांच साल से कम उम्र के बच्चों में बौनेपन की व्यापकता और भी ज्यादा, यानी 37.07 प्रतिशत है।

ये भी बता दें कि महिला एवं बाल विकास मंत्रालय के जून 2025 के आंकड़ों के अनुसार, बच्चों में छोटे कद के पीछे कुपोषण एक प्रमुख कारण है, जिसमें दीर्घकालिक या बार-बार होने वाला कुपोषण भी शामिल है।

और फिर भारत में 19 वर्षों में बौनेपन की औसत दर 42.4% से घटकर 29.4% हुई है, लेकिन कुछ जिलों में अभी भी चिंताजनक स्तर पर है।

और फिर यह डेटा महिला एवं बाल विकास मंत्रालय द्वारा पोषण ट्रैकर पर उपलब्ध है, जिसमें बच्चों के पोषण और विकास की जानकारी भी दर्ज की जाती है।

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