चाइल्ड ट्रैफिकिंग की कहानी, जो कर देगी बेहद हैरान

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पुलिस की जांच में अब ये सामने आया है कि यह कोई छोटा-मोटा गिरोह नहीं, बल्कि कई राज्यों में फैला एक संगठित नेटवर्क था।

फिर जिसमें बिचौलिए, अस्पताल संचालक, लैब टेक्नीशियन, आशा वर्कर, ड्राइवर, बच्चों के सप्लायर, खरीदार दंपति और यहां तक कि कुछ मामलों में बच्चों के जैविक माता-पिता भी शामिल थे।

फिर दिल्ली पुलिस के मुताबिक इस मामले में अब तक 23 आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है।

फिर इनमें अस्पताल संचालक, बच्चे सप्लाई करने वाले एजेंट, खरीदार दंपति, बिचौलिए और जैविक माता-पिता शामिल हैं। और वहीं, 9 मासूम बच्चों को इस नेटवर्क से मुक्त कराया गया है।

फिर पुलिस का कहना है कि जांच अभी जारी है और आने वाले दिनों में कई और गिरफ्तारियां भी हो सकती हैं।

और फिर पूरे मामले की शुरुआत किसी बड़ी एजेंसी की सूचना से नहीं बल्कि एक आम नागरिक की सतर्कता से ही हुई।

फिर एक व्यक्ति ने पुलिस को बताया कि पहाड़गंज इलाके में एक महिला अक्सर अलग-अलग नवजात बच्चों के साथ दिखाई देती है।

और कभी उसके पास लड़का होता, कभी लड़की। फिर कुछ दिनों बाद वही महिला फिर किसी दूसरे बच्चे के साथ नजर आती थी। और उसकी गतिविधियां संदिग्ध लगीं तो सूचना पुलिस तक भी पहुंची।

फिर सूचना मिलते ही सेंट्रल डिस्ट्रिक्ट की ऑपरेशन यूनिट सक्रिय हो गई। फिर पुलिस ने सबसे पहले पहाड़गंज और आसपास के इलाके के सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगालनी शुरू की।

फिर कई दिनों तक फुटेज देखने के बाद महिला की पहचान ज्योति उर्फ कमलेश के रूप में हुई।

साथ ही महिला की पहचान होने के बाद पुलिस ने जल्दबाजी में कार्रवाई नहीं की। फिर उसकी गतिविधियों पर लगातार नजर भी रखी गई।

फिर उसके मिलने-जुलने वाले लोगों की जानकारी भी जुटाई गई। और फिर यह पता लगाने की कोशिश की गई कि वह बच्चों के साथ आखिर करती क्या है।

और फिर जांच के दौरान पता चला कि वह नवजात बच्चों के सौदे में शामिल है। फिर इसके बाद पुलिस ने उसे रंगे हाथों पकड़ने के लिए डिकॉय ऑपरेशन की योजना भी बनाई।

और फिर शुरुआत में पुलिस को लगा कि यह सिर्फ एक बच्चे की खरीद-बिक्री का मामला है।

लेकिन जैसे-जैसे तीनों आरोपियों से पूछताछ आगे बढ़ी, पुलिस के सामने हैरान करने वाली जानकारी भी आती गई।

फिर पूछताछ में पता चला कि यह गिरोह कई राज्यों में सक्रिय है और पिछले करीब डेढ़ साल से बच्चों की खरीद-फरोख्त भी कर रहा है।

फिर ताजा कार्रवाई में पुलिस ने चार और बच्चों को सुरक्षित बरामद भी किया। और रोहिणी से 16 दिन का एक नवजात लड़का, ऋषिकेश से एक महीने का नवजात।

फिर मथुरा से लगभग एक साल एक महीने का बच्चा और हरिद्वार से करीब आठ महीने का बच्चा भी बरामद किया गया है।

और फिर इससे पहले भी पांच बच्चों को हरियाणा, पानीपत और ग्वालियर समेत विभिन्न स्थानों से ही मुक्त कराया जा चुका था।

फिर इनमें 27 दिन के जुड़वां बच्चों सहित कई नवजात भी शामिल थे। फिर पुलिस के अनुसार रेस्क्यू किए गए चार बच्चे आदिवासी परिवारों से ही जुड़े हुए हैं।

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