हमारे वातावरण में कई ऐसे कीड़े हैं, जो खेती किसाने के लिए नुकसानदायक नहीं, बल्कि फायदेमंद भी होते हैं।
और फिर ऐसे ही एक कीड़ा लेडी बर्ड बीटल कहलाता है, जो कृषिमित्र माना जाता है। फिर ये लेडीबर्ड बीटल कई तरह की फसलों में लगने वाले कीड़ों को खा भी जाता है।
और फिर ऐसे में सरकार चाहती है कि ऐसे कीड़ों के बारे में किसान जानें समझें। और फिर रासायनिक कीटनाशक की जगह इन कीटों का प्रयोग कर जैविक तरीके से खेती किसानी भी करें।
फिर यही वजह है कि अब इन कीड़ों को लैब में पैदा भी किया जा रहा है, जिससे किसानों तक इन्हें आसानी से पहुंचाया भी जा सके।
और फिर सागर यूनिवर्सटी के जूलाॅजी विभाग के असि. प्रोफेसर शाश्वत सिंह को भारत सरकार की ओर से विशेष प्रोजेक्ट मिला है।
और फिर जिसमें वे लेडीबर्ड बीटल पर शोध करेंगे। फिर प्रोफेसर शाश्वत लैब में लेडीबर्ड बीटल को पैदा करेंगे और फिर किसानों तक कैसे इनको पहुंचाया भी जाए। और ये तरीका भी खोंजेगे।
साथ ही डाॅ. शाश्वत सिंह ने इजराइल में करीब साढ़े पांच साल तक खेती के लिए फायदेमंद कीटों पर रिसर्च भी की है।
और फिर उनका कहना है कि इजराइल के किसान इन कीटों के बारे में बखूबी जानते हैं। और फिर ये बाजार में बेचे भी जाते हैं। इसी तरह की जागरूकता भारत में लाने के प्रयास चल रहे हैं।
और फिर वहां किसान और वैज्ञानिक मिलकर खेत पर काम भी करते हैं। और वहां किसान खेती के लिए फायदेमंद कीट और उनके उपयोग के बारे में अच्छे से भी जानते हैं।
फिर कई किसान तो फायदेमंद कीटों का उत्पादन करके उनके बाजार में बेचते हैं। और फिर दूसरे किसान खरीदकर अपनी फसल बचाने के लिए उपयोग भी करते हैं।
लेकिन भारत में काफी ज्यादा जनसंख्या और कृषि क्षेत्र अव्यवस्थित है, छोटे किसानों की संख्या काफी ज्यादा है।
और इसलिए यहां के किसानों को इन फायदेमंद कीटों की कम जानकारी है। फिर इसलिए यहां जैसे कृषि बुलेटिन और पाॅकेट डायरी के जरिए किसानों तक लेडीबर्ड बीटल के बारे में जानकारी भी पहुंचाई जा सकती है।
और इसमें फसलों में लगने वाले कीटों और उनको रोकने के उपाय की जानकारी भी दी जा सकती है। और मैं पांच तरह के कीटों पर रिसर्च भी कर चुका हूं।
तो फिर किसान मुझसे मिलकर अपनी समस्या के बारे में बता सकते हैं। और इस कीड़े को लैब में बड़ी संख्या में बनाकर जिस तरह सरकार मधुमक्खी पालन और रेशमकीट पालन का लगातार प्रशिक्षण भी दे रही है।