अमेरिकी डॉलर के कमजोर रुख के बीच ही अब भारतीय रुपया शुक्रवार को शुरुआती कारोबार में दो पैसे और भी मजबूत होकर 95.43 रुपये प्रति डॉलर पर पहुंच गया।
हालांकि घरेलू शेयर बाजार से ही विदेशी पूंजी की निकासी और वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच ही कच्चे तेल की कीमतों में तेजी रुपये के लिए दबाव का कारण भी बनी हुई है।
साथ ही अंतरबैंक विदेशी मुद्रा विनिमय बाजार में ही रुपया 95.39 प्रति डॉलर पर खुला।
फिर इसके बाद यह अमेरिकी मुद्रा के मुकाबले 95.43 के स्तर पर आ गया। और यह पिछले बंद भाव की तुलना में दो पैसे की मामूली मजबूती है।
और फिर गुरुवार को रुपया 12 पैसे कमजोर होकर 95.45 प्रति डॉलर पर बंद भी हुआ था।
फिर दुनिया की छह प्रमुख मुद्राओं के मुकाबले अमेरिकी डॉलर की स्थिति बताने वाला ही डॉलर इंडेक्स 0.08 प्रतिशत गिरकर 99.78 पर ही रहा।
और अब डॉलर में कमजोरी का असर शुरुआती कारोबार में रुपये को मामूली मजबूती मिलने के रूप में दिखाई भी दिया।
लेकिन बाजार विशेषज्ञों के मुताबिक ही रुपये की चाल पर घरेलू और वैश्विक दोनों कारकों का असर भी बना हुआ है।
और फिर अंतरराष्ट्रीय तेल मानक ब्रेंट क्रूड का वायदा भाव 0.16 प्रतिशत बढ़कर 87.21 डॉलर प्रति बैरल पर भी पहुंच गया।
बात रही कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी भारतीय रुपये के लिए चुनौती भी बन सकती है, क्योंकि भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के एक बड़े हिस्से के लिए आयात पर निर्भर है।
और फिर ऐसे में महंगा कच्चा तेल डॉलर की मांग और आयात लागत को प्रभावित भी कर सकता है।
फिर इस तरह रुपये की मामूली मजबूती के बावजूद घरेलू शेयर बाजार की कमजोरी, और विदेशी निवेशकों की बिकवाली और कच्चे तेल की कीमतें भारतीय मुद्रा के लिए महत्वपूर्ण कारक भी बने हुए हैं।