लगातार हो रही बारिश और नदियों के बढ़े जलस्तर से उत्तर प्रदेश में बाढ़ का संकट सोमवार को भी बना रहा।
फिर प्रदेश के 17 जिले प्रभावित हैं और करीब 1.70 लाख आबादी बाढ़ की चपेट में है।
और फिर पश्चिमी यूपी में गंगा-रामगंगा का दबाव से फर्रुखाबाद, कासगंज, बदायूं, मुरादाबाद और शाहजहांपुर के निचले इलाकों में मुश्किलें हैं। तो फिर पूर्वांचल में गंगा, घाघरा-सरयू और राप्ती के जलस्तर से हालात खराब हैं।
और मंगलवार को पूर्वी यूपी में कई जगह भारी बारिश तो पश्चिमी यूपी में भी बारिश का दौर जारी रहने का अनुमान है। फिर सरकार ने राहत कार्य में पूरी ताकत भी झोंक रखी हैं।
साथ ही बाढ़ प्रभावित जिलों में अयोध्या, आजमगढ़, बलिया, बाराबंकी, बदायूं, चित्रकूट, फर्रुखाबाद, हमीरपुर, हरदोई, कासगंज, कन्नौज, कानपुर नगर, लखीमपुर खीरी, मुरादाबाद, संत कबीर नगर, शाहजहांपुर और वाराणसी भी शामिल हैं।
और राहत आयुक्त कार्यालय के अनुसार अब तक बाढ़ से जनहानि और पशुहानि शून्य है।
फिर गंगा और रामगंगा के बढ़े जलस्तर से फर्रुखाबाद, कासगंज, बदायूं, मुरादाबाद, शाहजहांपुर और कन्नौज के नदी किनारे तथा निचले इलाकों में संकट भी ज्यादा है।
फिर फर्रुखाबाद के राजेपुर क्षेत्र में गंगा-रामगंगा का पानी गांवों और खेतों तक पहुंचा भी है।
जबकि कासगंज के पटियाली क्षेत्र में गंगा के उफान से कई गांव प्रभावित हैं। और मुरादाबाद के खादर क्षेत्र में भी रामगंगा के बढ़े जलस्तर ने ग्रामीणों की चिंता भी बढ़ाई है।
इसके अलावा मौसम विभाग के ताजा पूर्वानुमान के मुताबिक 1 सितंबर से 5 सितंबर तक पूर्वी उत्तर प्रदेश में व्यापक बारिश की संभावना है।
जबकि पश्चिमी यूपी में भी 31 अगस्त से 5 सितंबर तक कहीं-कहीं भारी बारिश का दौर भी जारी रह सकता है।
और बंगाल की खाड़ी में बने निम्न दबाव क्षेत्र से जुड़े सिस्टम का असर पूर्वी यूपी तक पहुंचने की पूर्ण संभावना है।
फिर जिससे वहां बारिश की गतिविधियां बढ़ सकती हैं। और ऐसे में पहले से उफन रहीं नदियों और निचले इलाकों में अतिरिक्त सतर्कता भी बरती जा रही है।