- कानपुर में सफाई व्यवस्था का बदलेगा ढांचा, निजी कंपनियों को 180 करोड़ का ठेका; निगम को 61 करोड़ बचने का दावा
कानपुर। शहर की सफाई व्यवस्था में बड़ा बदलाव होने जा रहा है। सड़क पर झाड़ू लगाने, नालियों की सफाई, घर-घर से कूड़ा उठाने और कूड़ा निस्तारण की जिम्मेदारी अब बड़े स्तर पर निजी कंपनियों को दी जा रही है। नगर निगम ने शहर को दो-दो जोन के हिस्सों में बांटकर सफाई व्यवस्था निजी हाथों में देने की प्रक्रिया शुरू की है।
चार जोन के लिए कंपनियों का चयन लगभग पूरा हो चुका है, जबकि दो जोन के लिए टेंडर प्रक्रिया चल रही है। नगर निगम के अधिकारियों के मुताबिक नई व्यवस्था करीब तीन महीने में पूरी तरह लागू हो जाएगी।
वर्तमान में शहर के छह जोन के 110 वार्डों में घर-घर से कूड़ा उठाने की जिम्मेदारी अलग-अलग एजेंसियों के पास है। नई व्यवस्था लागू होने के बाद कंपनियां प्रत्येक बीट और क्षेत्र में सफाई की जिम्मेदारी संभालेंगी। नई कंपनियों के काम शुरू करने पर मौजूदा व्यवस्था में लगे कर्मचारियों को हटाया जाएगा।

सफाई पर खर्च बढ़ेगा, लेकिन निगम को बचेंगे 61 करोड़
नई व्यवस्था के तहत नगर निगम सफाई के लिए कंपनियों को सालाना करीब 180 करोड़ रुपये देगा। वहीं घर-घर से कूड़ा उठाने के एवज में मिलने वाला शुल्क करीब 24 करोड़ रुपये सालाना नगर निगम में जमा होगा।
नगर निगम के आंकड़ों के मुताबिक मौजूदा व्यवस्था में वेतन और अन्य खर्च को मिलाकर सफाई व्यवस्था पर करीब 193 करोड़ रुपये खर्च हो रहे हैं। नई व्यवस्था में अनुमानित कुल खर्च 241 करोड़ रुपये होगा। इसके बावजूद कर्मचारियों के वेतन और अन्य खर्च में बदलाव के कारण नगर निगम को करीब 61 करोड़ रुपये की बचत होने का अनुमान है।
आठ हजार सफाई कर्मचारियों की जरूरत
नई व्यवस्था में करीब 8,000 आउटसोर्स सफाई कर्मचारियों की जरूरत होगी। इनमें 4,000 मौजूदा आउटसोर्स कर्मचारी और 4,000 प्रस्तावित नए सफाई कर्मचारी शामिल हैं।
नगर निगम के अनुसार सफाई व्यवस्था को प्रभावी ढंग से संचालित करने के लिए कर्मचारियों की संख्या बढ़ाना जरूरी है। निजी कंपनियों के हाथों व्यवस्था जाने से सफाई कार्य की निगरानी भी नगर निगम करेगा।
📊 यह भी जानें
| बिंदु | आंकड़ा |
|---|---|
| सफाई पर कंपनियों को सालाना भुगतान | 180 करोड़ रुपये |
| घर-घर कूड़ा उठाने से निगम को आय | 24 करोड़ रुपये/वर्ष |
| मौजूदा सफाई कर्मचारी | 4,000 आउटसोर्स + 2,000 स्थायी |
| प्रस्तावित आउटसोर्स कर्मचारी | 8,000 |
| मौजूदा व्यवस्था का अनुमानित खर्च | 193 करोड़ रुपये |
| नई व्यवस्था का प्रस्तावित खर्च | 241 करोड़ रुपये |
| नगर निगम की अनुमानित बचत | 61 करोड़ रुपये |
| चार जोन में कंपनियां | फाइनल |
| बाकी जोन | टेंडर प्रक्रिया में |
| नई व्यवस्था लागू होने का समय | करीब 3 महीने |
जोनवार स्थिति
- जोन 1 और 2: एसआर कंस्ट्रक्शन हैदराबाद
- जोन 4 और 6: जेएस इन्वायरो गाजियाबाद
- जोन 3 और 5: कंपनी का चयन 15 दिन में तय होने की बात कही गई है।

