न्यूज़लिंक हिंदी डेस्क। दशहरा के दिन कई मान्यतायें लोगों के बीच प्रचलित हैं. ऐसे ही एक है दशहरा में नीलकंठ पक्षी के दर्शन। इसदिन लोग दशहरा में नीलकंठ पक्षी को देखना शुभ मानते हैं। लेकिन ऐसा क्यों इसके पीछे भी कई धारणाये हैं, चलिए आज हम आपको बताते हैं।
24 अक्तूबर मंगलवार को दशहरा यानी विजयादशमी है। मान्याता है कि त्रेतायुग में आश्विन मास की शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि के दिन प्रभु श्रीराम ने लंकापति रावण का वध कर माता सीता को उसके चंगुल से आजाद किया था। तब से हर साल इस दिन रावण के पुतले का दहन किया जाता है। दशहरा का पर्व बुराई पर अच्छाई की जीत का संदेश देता है। दशहरे के पर्व को लेकर कई तरह की मान्यताएं प्रचलित हैं।

इनमें से एक मान्यता है की इस दिन नीलकंठ पक्षी का दर्शन करना भी अत्यंत शुभ होता है। कहते हैं कि दशहरा के दिन नीलकंठ पक्षी के दर्शन से आपके सभी बिगड़े काम सही हो जाते हैं और जीवन में सुख समृद्धि भी आती है।
भगवान शिव ही नीलकंठ हैं
धर्म शास्त्रों के अनुसार भगवान शिव ही नीलकंठ हैं। इसी कारण से इस पक्षी को भगवान शिव का प्रतिनिधि और स्वरूप दोनों माना जाता है। मान्यता है कि दशहरा पर भगवान शिव नीलकंठ पक्षी का रूप धारण कर विचरण करते हैं। ऐसे में यदि किसी व्यक्ति को दशहरा के दिन नीलकंठ के दर्शन होते हैं तो इसे शुभ माना जाता है।
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घर में आती है खुशहाली
हिंदू धर्म में नीलकंठ पक्षी को बेहद शुभ माना जाता है। दशहरा के दिन इसके दर्शन होने से धन और संपत्ति में बढ़ोतरी होती है। मान्यता है कि दशहरा के दिन किसी भी समय नीलकंठ पक्षी दिख जाए तो इससे घर में खुशहाली आती है और वहीं आप जो भी काम करने जा रहे हैं उसमें सफलता मिलती है।
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प्रभु श्रीराम को रावण का वध करने से पहले हुए थे दर्शन
पौराणिक मान्यता के अनुसार जब भगवान श्री राम रावण का वध करने जा रहे थे तो उस दौरान उन्हें नीलकंठ पक्षी के दर्शन हुए थे। इसके बाद भगवान श्री राम को रावण पर विजय प्राप्त हुई थी। इसके अलावा कहा जाता है कि रावण का वध करने के बाद भगवान राम को ब्राह्मण हत्या का पाप लगा था। भगवान श्रीराम ने उस पाप से मुक्ति पाने के लिए शिवजी की आराधना की थी। मान्यता है कि श्रीराम को इस पाप से मुक्ति दिलाने के लिए शिव जी ने नीलकंठ पक्षी के रूप में दर्शन दिया था। तभी से दशहरे के दिन नीलकंठ के दर्शन की परंपरा है।

