न्यूज़लिंक हिंदी। करवा चौथ का त्योहार इस साल 1 नवंबर को पड़ रहा है। अखंड सौभाग्य की कामना से रखा जाने वाला करवा चौथ का यह व्रत कार्तिक कृष्ण चतुर्थी तिथि को होता है। इस दिन सभी महिलाएं अपने पति की लंबी आयु के लिए व्रत रखती हैं। सूर्योदय से चंद्रोदय तक रखने वाला यह व्रत इस बार 13 घंटे 42 मिनट की अवधि का होगा। आपका पूरे दिन भूखे-प्यासे रहना लेकिन एक काम के कारण आपका व्रत खंडित हो ये आपको अच्छा नहीं लगेगा। इसीलिए चलिए जानते है , व्रत में क्या नहीं करना चाहिए।
निर्जला व्रत रखें..
करवा चौथ का व्रत निर्जला होता है। सूर्योदय से पहले सरगी खाकर व्रत रखते हैं और पूरे दिन अन्न-जल से दूर रहते हैं| यह एक निराहार व्रत है। इस दिन गलती से भी अन्न और जल का सेवन न करें। नहीं तो आपका व्रत टूट जाएगा और आपको व्रत के फल की प्राप्ति नहीं होगी।
करवा चौथ व्रत कथा..
करवा चौथ की पूजा कथा के बिना अधूरी होती है। इसलिए जब आप शाम के समय में माता गौरी की पूजा करें तो करवा चौथ की व्रत कथा भी जरुर सुनें। कथा सुनने से व्रत पूरा होता है।
पूजा और सुहाग की सामग्री सास को अवश्य दें..
करवा चौथ की पूजा के बाद अपनी सास को पूजा और सुहाग की सामग्री जरुर दें। ऐसा करने से वे खुश होकर आपको अखंड सौभाग्य और सुखी वैवाहिक जीवन का आशीर्वाद देंगी। आपके पति की उम्र बढ़ेगी।
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दिन में न सोएं..
करवा चौथ के व्रत वाले दिन महिलाओं को दिन में नहीं सोना चाहिए। व्रत रखकर सोने से व्रत नहीं माना जाता है। करवा चौथ के साथ सभी व्रतों में ऐसा नहीं करना चाहिए। हालांकि जिनका स्वास्थ्य ठीक नहीं है वो ऐसा कर सकती हैं।
करवा चौथ व्रत की पूजा-विधि..
1. सुबह सूर्योदय से पहले स्नान आदि करके पूजा घर की सफाई करें। फिर सास की सरगी ग्रहण करें और भगवान की पूजा करके निर्जला व्रत का संकल्प लें।
2. यह व्रत उनको सूरज अस्त होने के बाद चंद्र दर्शन करके ही खोलना चाहिए और इस बीच जल भी नहीं पीया जाता।
3. संध्या के समय एक मिट्टी की वेदी पर सभी देवताओं की स्थापना करें। इसमें 10 से 13 करवे (करवा चौथ के लिए खास मिट्टी के कलश) रखें।
4. पूजन-सामग्री में धूप, दीप, चंदन, रोली, सिंदूर आदि थाली में रखें। दीपक में पर्याप्त मात्रा में घी रहना चाहिए, जिससे वह पूरे समय तक जलता रहे।
5. चंद्रमा उदय से लगभग एक घंटे पहले पूजा शुरू की जानी चाहिए। अच्छा हो कि परिवार की सभी महिलाएं साथ पूजा करें।
6. पूजा के दौरान करवा चौथ कथा सुनें या सुनाएं।
7. चंद्र दर्शन छलनी से किया जाना चाहिए और साथ ही दर्शन के समय अर्घ्य के साथ चंद्रमा की पूजा करनी चाहिए।
8. चंद्र दर्शन के बाद बहू अपनी सास को थाली में सजाकर मिष्ठान, फल, मेवे, रूपये आदि देकर उनका आशीर्वाद ले और सास उसे अखंड सौभाग्यवती होने का आशीर्वाद दे।

