बड़वानी में अजीबो गरीब मामला, घर में सजी अर्थी और श्मशान घाट पर चिता, जानिए फिर कैसे जिंदा हो गया मृतक

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बड़वानी जिले के अंजड कस्बे में हैरान करने वाला मामला सामने आया। और रिश्तेदारों ने अंतिम संस्कार के लिए चिता सजा ली।

इसके बाद लोग डेडबॉडी लेने के लिए जब बड़वानी जिला अस्पताल पहुंचे तो डॉक्टर्स ने उस शख्स को जिंदा बताया। और ये सुनकर सारे रिश्तेदार खुशी से झूम तो उठे लेकिन घनघोर आश्चर्य भी हुआ।

ये भी बता दें कि दरअसल, बिल्वारोड के रहने वाले मांगीलाल कुछ दिन पहले काम करते समय गिरकर घायल हो गए थे। और पास में कोई नजदीकी रिश्तेदार नहीं होने के चलते उन्हें गांव के लोगों ने अंजड सिविल अस्पताल पहुंचाया।

और जहां से उन्हें बड़वानी जिला अस्पताल रेफर किया गया। और उन्हें आईसीयू वार्ड में भर्ती कर इलाज भी शुरू किया गया। और ऐसे में किसी ने रिश्तेदारों को फोन पर बताया कि अस्पताल में भर्ती मांगीलाल की मौत भी हो चुकी है।

और इसके बाद गांव के लोगों ने मांगीलाल का अंतिम संस्कार करने के लिए दो वाहनों में लकड़ियां और अन्य सामग्री जुटाकर श्मशान में चिता की तैयारियां शुरू कर दी।

और जब गांव के लोग शव लेने बड़वानी जिला अस्पताल पहुंचे तब पता चला कि मांगीलाल तो जिंदा हैं और उसकी सांसें भी चल रही हैं। और जब यह बात अस्पताल पहुंचे लोगों सहित श्मशान में मांगीलाल की चिता सजा रहे लोगों को पता चली तो सब आश्चर्यचकित रह गए।

क्योंकि अंतिम संस्कार की पूरी तैयारी कर ली गई थी। ग्राम बिलवा रोड के लाला सोलंकी ने बताया “मांगीलाल मेरे रिश्तेदार हैं। और बड़वानी के आइसोलेशन वार्ड में भर्ती भी हैं।

बड़वानी अस्पताल से मेरे पास शाम को एक कॉल आया कि आपके रिश्तेदार की मौत भी हो गई है। और इन्हें अस्पताल से भी ले जाओ।

और उसके बाद रिश्तेदारों के साथ गांव के लोग बड़वानी जिला अस्पताल शव को लेने पहुंचे। और जब वहां पहुंचे तो पता चला कि मांगीलाल जिंदा हैं। और हालांकि मरीज की हालत ज्यादा खराब है।

और वहीं, इस मामले में समाजसेवी अजीत जैन ने बताया “जिस मरीज के परिजन और रिश्तेदार नहीं होते है तो उन्हें आइसोलेशन वार्ड में भर्ती किया जाता है। और मरीज की हालत ज्यादा खराब है तो उसे पलंग में नहीं सुलाया जाता।

और उसे आंगन में सुलाया जाता है, जिससे उसे गिरने की संभावना नहीं रहती। ” और वहीं, इस मामले में सिविल सर्जन अनीता सिंगारे ने बताया “इस प्रकार की जानकारी उन्हें मीडिया से भी पता चली। और हॉस्पिटल से फोन लगाकर ऐसी जानकारी नही दी जाती है। “

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