असम पुलिस की स्पेशल टास्क फ़ोर्स ने अब ये दावा किया है कि उसने बांग्लादेश के एक चरमपंथी समूह इमाम महमूदुर क़ाफ़िला के 11 लोगों को गिरफ़्तार किया है।
साथ ही आईएमके बांग्लादेश के प्रतिबंधित चरमपंथी संगठन जमात-उल-मुजाहिदीन की एक शाखा है, फिर जिसका गठन 2018 में ही किया गया था।
और फिर इस कार्रवाई पर जानकारी देते हुए कहा स्पेशल टास्क फ़ोर्स के प्रमुख और गुवाहाटी के पुलिस कमिश्नर पार्थ सारथी महंत ने एक प्रेस कॉन्फ़्रेंस में कहा।
आईएमके के लोग असम और आस-पास के राज्यों में युवाओं को कट्टरपंथी बनाने और संगठन में भर्ती करने का काम भी कर रहे थे।
और फिर वे प्रोपेगेंडा फैलाने, हवाला या यूपीआई के ज़रिए फंड जुटाने और ट्रेनिंग के लिए सीमा पार यात्रा की सुविधा देने के लिए ही कई एन्क्रिप्टेड सोशल मीडिया ग्रुप का इस्तेमाल भी कर रहे थे।
और फिर पुलिस अधिकारी ने कहा, जांच में ये भी पता चला कि अगस्त 2024 में बांग्लादेश में सत्ता बदलने के बाद जेएमबी,अंसारुल्लाह बांग्ला टीम और अल-क़ायदा इन द इंडियन सबकॉन्टिनेंट के टॉप नेताओं ने आईएमके लीडरशिप को ही अपने भारतीय मॉड्यूल को एक्टिव करने और फैलाने के निर्देश भी दिए थे।
इसके अलावा पुलिस ने बारपेटा से जिन लोगों को गिरफ़्तार भी किया है उनकी शिनाख़्त नसीम उद्दीन उर्फ़ नजीमुद्दीन उर्फ़ तमीम , मिजानुर रहमान, सुल्तान महमूद , सिद्दीक अली, शाहरुख़ हुसैन और दिलबर रजाक के तौर पर ही की गई है।
जबकि बाक्सा ज़िले से राशिदुल आलम और महिबुल ख़ान को गिरफ़्तार भी किया गया है। और फिर वहीं चिरांग ज़िले से जुनाब अली, दरांग से अफ़राहिम हुसैन और त्रिपुरा से जागीर मियां को भी गिरफ़्तार किया गया है।
इसके साथ ही पुलिस ने ये भी बताया कि इन गिरफ़्तार लोगों पर बीएनएस, 2023 और गै़रक़ानूनी गतिविधियां के अधिनियम, 1967 के तहत ही कई आरोप भी लगाए गए हैं।