CAA law: मौलाना शाहबुद्दीन रिजवी ने सीएए का किया समर्थन, मुस्लिम लीग ने दायर की याचिका

वहीं विपक्ष इस मुद्दे पर सरकार के खिलाफ है। कांग्रेस ने कहा कि सीएए, भेदभाव को बढ़ावा देता है और यह भारतीय संविधान के मूल सिद्धांतों के विपरीत है।

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न्यूज़लिंक हिंदी। केंद्र सरकार ने सोमवार को सीएए लागू करने का नोटिफिकेशन जारी कर दिया। वहीं विपक्ष इस मुद्दे पर सरकार के खिलाफ है। कांग्रेस ने कहा कि सीएए, भेदभाव को बढ़ावा देता है और यह भारतीय संविधान के मूल सिद्धांतों के विपरीत है। बता दे कि आज सुप्रीम कोर्ट में सीएए कानून के खिलाफ याचिका दायर की गई है। यह याचिका इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग की तरफ से दायर की गई है, जिसमें कानून पर रोक लगाने की मांग की गई है। याचिका में कहा गया है कि नागरिकता कानून के तहत कुछ धर्मों के लोगों को ही नागरिकता दी जाएगी, जो संविधान के खिलाफ है।

सीएए कानून के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की गई है। यह याचिका इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग की तरफ से दायर की गई है, जिसमें सीएए कानून पर रोक लगाने की मांग की गई है। याचिका में नागरिकता संशोधन कानून 2019 के प्रावधानों को देश में लागू करने पर रोक लगाने की मांग की गई है। याचिका में कहा गया है कि नागरिकता कानून के तहत कुछ धर्मों के लोगों को ही नागरिकता दी जाएगी, जो संविधान का उल्लंघन है।

यह बहुत पहले लागू हो जाना चाहिए था
ऑल इंडिया मुस्लिम जमात के अध्यक्ष मौलाना शाहबुद्दीन रिजवी बरेलवी ने सीएए नोटिफिकेशन जारी होने का स्वागत किया और कहा कि ‘यह बहुत पहले लागू हो जाना चाहिए था। इस कानून को लेकर मुस्लिमों में बहुत गलतफहमी है। इस कानून का मुस्लिमों से कोई लेना-देना नहीं है। पहले पाकिस्तान, अफगानिस्तान और बांग्लादेश से आने वाले गैर-मुस्लिमों को भारत की नागरिकता देने का कोई प्रावधान नहीं था।

यही वजह है कि ये कानून बनाया गया। देश के करोड़ों मुसलमान इस कानून से प्रभावित नहीं होंगे और इससे किसी की नागरिकता नहीं जाएगी। बीते वर्षों में गलतफहमी की चलते विरोध प्रदर्शन हुए। कुछ राजनेताओं ने मुस्लिमों में गलतफहमी को बढ़ावा दिया और देश के हर मुसलमान को इस कानून का स्वागत करना चाहिए।

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