1971 की जंग से मां पाकिस्तान में रह गईं, बेटा हिंदुस्तान में, दूरबीन से करते थे एक दूजे का दीदार

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न्यूज़लिंक हिंदी। 1971 की जंग से पाकिस्तानी से हिंदुस्तानी बने गोबा की जिंदगी पहाड़ों की तरह ही उतार-चढ़ाव से पूर्ण रूप से भरी हुई है। इसमें खुशी भी है तो पाकिस्तान से मिला ऐसा गम भी जिसे वह आज नहीं भूल पाते। वह बड़े गर्व से अपने आप को भारतीय सेना का बेटा कहते हैं।

थांग के साथ ही इसके आसपास के तीन और गांव तुरतुक, त्याक्षी और चुलुंका 17-18 दिसंबर, 1971 से पहले तक पाकिस्तान का हिस्सा हुआ करते थे। 1971 की जंग में भारत की जीत हुई। भारतीय सेना पाकिस्तान की तरफ बढ़ती जा रही थी कि तभी 18 दिसंबर, 1971 की सुबह 6 बजे अचानक सीजफायर का ऐलान कर दिया गया।

भारतीय सेना पाकिस्तान में और अंदर नहीं गई। जहां थी वहीं थम गई। बस, यहीं से गोबा अली और इनके परिवार की नई जिंदगी की कहानी भी शुरू होती है। गोबा अली बताते है कि उस जंग में वह केवल 5 साल के ही थे। जंग के दौरान उनके गांव थांग के अलावा अन्य कई गांवों की ज्यादातर महिलाओं और बच्चों को पाकिस्तानी आर्मी ने अपनी तरफ पीछे बुला लिया था।

गांव में ज्यादातर पुरुष रहे गए थे। वह कहते है, सीजफायर होने तक भारतीय सेना थांग गांव समेत 4 गांवों को अपने अंडर में ले चुकी थी। सीजफायर होने के बाद एल ओ सी बना दी गई। गांव की दूसरी कई महिलाओं के साथ मेरी मां पाकिस्तान के कब्जे वाले आखिरी गांव फरनू में रह गई। जंग खत्म होने के बाद उन्होंने अपनी मां को वापस लाने की लाख कोशिश की, लेकिन पाकिस्तानियों ने उनकी मां को नहीं भेजा।

कुछ समय बाद किसी तरह भारतीय सेना ने गोबा की मां को लाने के लिए उनके पिता को पाकिस्तान भेजा। लेकिन वहां उन्हें 6 साल के लिए बंदी बना लिया गया। इसके बाद लगातार कोशिश करने पर दिसंबर, 2014 में वह पाकिस्तान जाने में कामयाब हो पाए। वहां वह अपनी मां अमीना और जेल से छूट चुके पिता से मिले। 10 महीने तक गोबा पाकिस्तान रहे और सितंबर 2015 में भारत अपने गांव लौट मुख्य रूप से आए।

भारत आने से पहले गोबा ने अपनी मां से कहा कि अब मेरा यहां आना बहुत मुश्किल है। उन्होंने तय किया कि हम दोनों देशों की सीमाओं के अंत वाली पहाड़ी पर हर जुम्मे को तय समय पर एक-दूसरे को दूरबीन के जरिए देख सकते हैं। फिर गोबा भारत आ गए और यहां से अपनए अम्मी- अब्बू के दीदार करने का एक नया सिलसिला शुरू हुआ। यह सिलसिला 2017 में मां और 2018 में पिता की मौत तक जारी रहा। भारत से गोबा अली और पाकिस्तान से इनकी मां-पिता जी दूरबीन से एक-दूसरे को मुख्य रूप से देखा करते थे।

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