भारत में हाल के ही महीनों में हुए प्रदर्शनों पर पुलिस की सख़्त कार्रवाई को लेकर अब संयुक्त राष्ट्र ने मुख्य चिंता जताई है।
और फिर संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार उच्चायुक्त कार्यालय के अनुसार, अब भारतीय अधिकारियों से शांतिपूर्ण प्रदर्शन के अधिकार का सम्मान ही करने, फिर उसकी रक्षा करने और मानवाधिकार उल्लंघनों के मामलों में ही अब न्याय करने की मुख्य अपील की है।
और फिर संयुक्त राष्ट्र के विशेषज्ञों ने ये भी आरोप लगाया कि भारतीय अधिकारियों को शांतिपूर्ण सभा पर अनुचित प्रतिबंध लगाने, फिर अत्यधिक बल प्रयोग करने, और मनमाने ढंग से हिरासत में लेने और फिर स्टूडेंट्स को निशाना बनाने जैसे मामलों को लेकर पहले भी आगाह किया जा चुका है।
इसके अलावा संयुक्त राष्ट्र की ओर से मंगलवार को जारी आधिकारिक बयान में ये भी कहा गया, मिली ख़बरों के मुताबिक़, मार्च में सादे कपड़ों में आए पुलिसकर्मियों ने अब नई दिल्ली में स्टूडेंट राइट्स और मज़दूरों के अधिकारों के लिए काम करने वाले ही 10 कार्यकर्ताओं को हिरासत में भी लिया था।
और फिर उन्हें 24 घंटे से ही ज़्यादा समय तक किसी से संपर्क नहीं करने भी दिया गया। फिर आरोप है कि इस दौरान उनके साथ बुरा व्यवहार भी किया गया।
उन्हें धमकाया गया, और दबाव भी डाला गया और जबरन बयान दिलवाए गए। फिर बाद में अदालत ने उन्हें रिहा भी किया।
इसके साथ ही संयुक्त राष्ट्र के विशेषज्ञों ने कहा, ये कदम भारत के अंतरराष्ट्रीय क़ानून के तहत ज़रूरी बुनियादी दायित्वों का उल्लंघन भी करते हैं।
और इनमें शांतिपूर्ण तरीक़े से इकट्ठा होने की आज़ादी, अपनी बात कहने की आज़ादी, व्यक्तिगत स्वतंत्रता, सुरक्षा और मानवाधिकारों की रक्षा के लिए आवाज़ उठाने का अधिकार भी शामिल हैं।
और फिर सरकार को यह सुनिश्चित करना होगा कि ऐसी घटनाएं दोबारा बिल्कुल भी न हों।
और स्टूडेंट्स व दूसरे लोगों के लोकतांत्रिक अधिकार की रक्षा की जाए, ताकि वे एक जगह इकट्ठा होकर अपनी शिकायतें और नाराज़गी को जाहिर भी कर सकें।
इसके साथ ही संयुक्त राष्ट्र विशेषज्ञों ने मुख्य मांग की है कि क़ानूनी एजेंसियों और उनसे जुड़ी दूसरी ताक़तों के कामकाज की स्वतंत्र, निष्पक्ष और पूरी जांच बिना किसी देरी के शुरू भी की जाए।