कानपुर की लेबर कॉलोनियों में रहने वालों के लिये खुशखबरी, आवंटन के लिये शुरू होगा सर्वे

Kanpur Labour Colony : लखनऊ बापू भवन में उत्तर प्रदेश परामर्श दात्री समिति श्रम मंत्रालय की बैठक हुई जिसमें विशेष सचिव श्रम के प्रस्ताव पर गर्मागर्मी हो गई।

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लेबर कालोनियों में रहने वालों को मालिकाना हक मिलेगा या नहीं? इस सवाल से 18 क्वार्टर में रहने वाले परिवार परेशान हैं। गुरुवार को लखनऊ बापू भवन में उत्तर प्रदेश परामर्श दात्री समिति श्रम मंत्रालय की बैठक हुई जिसमें विशेष सचिव श्रम के प्रस्ताव पर गर्मागर्मी हो गई। उन्होंने कहा कि पहले खाली पड़ी हुई जगह पर कमर्शियल स्पेस बना लिया जाए और फिर मूल आवंटी और उसके बाद सिग्मी लोगों और उसके बाद बड़े लोगों के काबिज मकान को अलग-अलग दर पर उन्हें आवंटन करने की पॉलिसी बनाई जाए। उन्होंने आगे कहा कि या फिर पहले खाली पड़े हुए पार्क व अन्य स्थलों पर अपार्टमेंट की तर्ज पर फ्लैट बनाया जाए और उनका आवंटन करके तब इस कॉलोनी को डिमोलिश कर दिया जाये और दोबारा इसका निर्माण कर जो जिस श्रेणी में आता हो उनको उनकी पात्रता के आधार पर निर्माण कराने के बाद आवंटन किया जाए।

(लखनऊ बापू भवन में उत्तर प्रदेश परामर्श दात्री समिति श्रम मंत्रालय की बैठक हुई)

विशेष सचिव श्रम का इतना कहना था कि विधायक सुरेंद्र मैथानी भड़क गये और प्रस्ताव को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि यह मैं किसी कीमत पर नहीं होने दूंगा। उन्होंने कहा कि आपने पिछले 60 साल में 1 रुपये का भी मेंटेनेंस नहीं कराया। आप किस आधार पर उसको अपनी संपत्ति मान रहे हो कहा कि हम लोगों ने हमारी सरकार ने लेबर कॉलोनियों की सड़क, नाली, सीवर, बिजली, विकास कार्यों और पार्कों का विकास कराकर, उसे रहने योग्य बनाया है और अब आप,अपना मालिकाना हक समझकर, आधार हीन कोई भी ऐसा निर्णय नहीं कर सकते। जो वहां की जनता की मूल भावनाओं के खिलाफ हो। मैं इसका विरोध करता हूं। उन्होंने बैठक में कहा कि किसी भी कीमत पर नहीं होने दूंगा। यह पूरी तरह जन विरोधी है मुझे समझाने का प्रयास न करें। कहा कि पहले मुझसे बात करो तब कोई कदम आप आगे बड़ा पाओगे। इतने में पूरी बैठक में सन्नाटा छा गया।

बैठक के अंत में प्रमुख सचिव श्रम एमके शानमुगा सुंदरम ने कहा की विधायक जी का पक्ष व्यावहारिक है। इस पर कहा कि कानपुर की श्रम कॉलोनी से ही इसका सर्वे अध्ययन प्रारंभ करें जिसको 6 महीने के अंदर पूर्ण कर लिया जाए। जिसमें लोकल अथार्टी, नगर निगम अथवा केडीए अथवा आवास विकास को सम्मिलित करके उसमें टेक्निकल दृष्टि से जेई तथा पीडब्ल्यूडी के लोगों को भी शामिल करके और परामर्शदात्री के सदस्य के नाते विधायक जी को भी शामिल करके अध्ययन रिपोर्ट अभिलंब तैयार की जाए। जिसे शासन, कैबिनेट को प्रेषित की जा सके। बैठक में विधायक मंजू शिवाज, श्रम आयुक्त मारकंडे शाही, विशेष सचिव कुणाल सिल्कू, विशेष सचिव निलेश कुमार सिंह, उपश्रमायुक्त पंकज सिंह राणा, उपश्रमायुक्त रचना केसरवानी, उप श्रमायुक्त जय प्रताप, उपश्रमायुक्त अनुराग मिश्रा आदि रहे।

शहर में इन स्थानों पर हैं श्रमिक कालोनियां: ”शास्त्री नगर, किदवई नगर, जूही सफेद कालोनी, लाल कालोनी, जेके कालोनी, चकेरी, गोविंद नगर, विष्णुपुरी, बाबूपुरवा, ईदगाह व दादा नगर। शहर में 18000 से अधिक श्रमिक कालोनियां हैं।”

विधायक सुरेंद्र मैथानी ने कहा कि उत्तर प्रदेश सदन में लगाई गई याचिका एवं लंबे समय से किये जा रहे संघर्ष के उन सारे बिंदुओं को शामिल किया जाये जिन पर लेबर कॉलोनी के निवासियों के मालिकाना पर फैसला काफी कुछ उनके पक्ष में आए। कहा की कॉलोनियों के स्वामित्व के मामले में जो जहां है, जितना है, जिसके पास है और जैसा है उसी हालत में उसी को उसका मालिकाना हक टोकन मनी ले करके दे दिया जाए। यह इसका व्यावहारिक पक्ष है। यदि हम कानूनी दांव पेज और दशकों पुराने, अव्यावहारिक नियमों के हिसाब से कोई नियमावली बनाएंगे तो वह सफल नहीं होगी। इसलिए हमें व्यावहारिक पक्ष के आधार पर ही जनहित में अपनी संस्तुति करके कैबिनेट को प्रस्ताव भेजना चाहिए।

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