न्यूज़लिंक हिंदी। कांकेर के रक्शाहाड़ा पहाड़ी पर मौजूद पत्थर से हड्डियों की खुश्बू आज भी आती है, कहा जाता है कि इस जंगल में भगवान राम ने वनवासकाल में राक्षस का वध किया था। उसी राक्षस की हड्डियां आज पत्थर बन चुकी है। जिसे जलाने ये घिसने से हड्डियों की खुश्बू आती है।
दरअसल, भगवान राम अपने 14 साल के वनवास काल में दंडकारण्य के जंगलो के यात्रा के दौरान उत्तर बस्तर कांकेर के जंगलो में एक दानव का वध किया था,आज भी उसका अवशेष कांकेर जिला मुख्यालय से 80 किलोमीटर दूर ग्राम खडगांव के रक्शाहाड़ा पहाड़ी पर मौजूद है। रक्शाहाड़ा पहाड़ी नाम है। हालांकि इसका हिंदी में नाम रक्षकों की हड्डियां है।
इन पत्थरों ने बारे में विस्तार से जानने के घने जंगलों और पहाड़ी रास्ते के नालों को पार कर रक्शाहाड़ा पहाड़ी पहुंची। यहां पतली सी धार बहती हुई झरने के बीच एक ऐसा पत्थर पाया, जिसको रगड़ने से या आग लगाने से हड्डियों की खुशबू आती है। जानकारी के मुताबिक अंतागढ़ क्षेत्र में विशालाकाय दानव हुआ करता था, जिसने इस क्षेत्र में दूर-दूर तक के जीवों को हवा से ही खींच कर खा जाता था।
इसलिए इस क्षेत्र में किसी प्रकार के जीवों का वास नहीं होता था। इससे तंग आकर ग्रामीण भागने लगे थे। उसी वक्त वनवास में बस्तर में आए भगवान राम को पता चला तो भगवान राम राक्षस को निंद्रा अवस्था में रावघाट की पहाड़ पर चढ़ कर तीर चलाए थे।
उस विशालकाय आदम खोर दानव को मारने के बाद वो फिर से जिंदा न हो इस लिए उसके शरीर को टुकड़े-टुकड़े कर दिए थे। सालों पहले यह पत्थर नहीं बल्कि पूरी तरह हड्डी के रूप में दिखता था, जिसे काटने या तोड़ने पर खून की महक भी आती थी। कभी कभी खून भी निकलता था।

