देशभर के कारोबारियों और व्यापारियों के लिए अब राहत भरी खबर है। फिर केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर एवं सीमा शुल्क बोर्ड द्वारा 57वीं जीएसटी काउंसिल की बैठक के निर्णयों के अनुपालन में 26 और 28 अक्टूबर को जारी किए गए।
और फिर महत्वपूर्ण परिपत्र संख्या 257 से 266 और विज्ञप्तियां एक नवंबर 2026 से प्रभावी भी हो गई हैं।
फिर इन संशोधनों का मुख्य उद्देश्य ईज ऑफ डूइंग बिजनेस को बढ़ावा देना और करदाताओं के सामने आने वाली व्यावहारिक कठिनाइयों को दूर भी करना है।
इसके साथ ही नए नियमों के तहत जीएसटी पंजीयन की प्रक्रिया को बेहद सरल कर दिया गया है।
और परिपत्र संख्या 257 के अनुसार अब आवेदन के समय आयकर पैन के आधार पर ही सही नाम, व्यवसाय की प्रकृति और अधिकृत व्यक्ति की जानकारी भी देनी होगी।
और मालिकाना हक के लिए रन्ट एग्रीमेन्ट या सहमति पत्र मान्य होंगे। फिर सबसे बड़ी राहत यह है कि अब विभाग द्वारा उद्यम प्रमाणपत्र की मांग भी नहीं की जाएगी।
साथ ही, बैंक खाते का विवरण आवेदन के समय देना अनिवार्य भी नहीं है। और इसे पंजीयन के बाद भी अपडेट किया जा सकता है। फिर सामान्य तौर पर सात कार्य दिवस के भीतर पंजीयन निस्तारित भी कर दिया जाएगा।
इसके अलावा परिपत्र संख्या 258 के जरिए कर अधिकारियों की मनमानी पर अंकुश लगाने की कोशिश भी की गई है।
फिर अब कारण बताओ नोटिस में केवल कानून की धाराएं लिखना ही काफी नहीं होगा। बल्कि अब टैक्स मांगने के ठोस साक्ष्य और आधार बताने होंगे।
फिर यदि धोखाधड़ी या जानबूझकर तथ्य छिपाने का आरोप है, तो उसे साक्ष्य सहित स्पष्ट भी करना होगा।
साथ ही विभाग को अनुमान और संदेह के आधार पर कार्रवाई करने के बजाय ही तर्कसंगत आदेश पारित करने भी होंगे।