कानपुर में निशुल्क एवं अनिवार्य बाल शिक्षा का अधिकार अधिनियम के तहत आर्थिक कमजोर छात्रों को दाखिला न देने वाले 22 स्कूलों की मान्यता अब रद्द होगी।
और बेसिक शिक्षा अधिकारी में मान्यता रद्द करने की संस्तुति की है। और उन्होंने कार्रवाई का संस्तुति पत्र स्कूल शिक्षा महानिदेशक, सीबीएसई के प्रयागराज रीजन के क्षेत्रीय अधिकारी व सचिव, डीएम, सीडीओ, एडीएम न्यायिक, एडी बेसिक, डीआईओएस को पत्र भी भेज दिया है।
प्रवेश कराने में लापरवाही बरतने पर छह खंड शिक्षाधिकारियों को नोटिस जारी कर स्पष्टीकरण भी मांगा गया है।
साथ ही आरटीई के तहत निजी स्कूलों में बच्चों को पढ़ाने का सपना संजोने वाले अभिभावकों को कई नामीगिरामी स्कूलों ने प्रवेश नहीं दिया।
अभिभावक स्कूलों के चक्कर भी काट रहे हैं। कभी अभिभावकों को बाद में आने तो कभी सीटें फुल होने की बात कहकर टरकाया जाता रहा है।
डीएम की भी चेतावनी इन स्कूलों पर बेअसर हो रही। और बीएसए भी कई बार नोटिस दे चुके हैं पर छात्रों को प्रवेश नहीं मिला। मंगलवार को बीएसए सुरजीत कुमार सिंह ने खंड शिक्षा अधिकारियों की रिपोर्ट के आधार पर 22 चिह्नित स्कूलों भी की।
शाम को यह पत्र जारी होने का पता चलते ही निजी स्कूलों के संचालकों में हलचल और भी तेज हो गई।
इसके अलावा बीएसए सुरजीत कुमार सिंह ने बताया कि लगातार चेतावनियों का स्कूलों पर कोई असर नहीं दिखाई दे रहा।
और अभिभावक अपने बच्चों के दाखिले के लिए परेशान हैं। और फिर कई बार चेतावनी दी गई, लेकिन स्कूलों ने दाखिले नहीं लिए।
और अब आरटीई अधिनियम के उल्लंघन पर उच्चाधिकारियों को पत्र लिखकर मान्यता खत्म करने की संस्तुति भी की गई है।