मोबाईल की लत तो बच्चों से लेकर ही बड़ों तक में आज के समय में देखने को भी मिलती ही है।
और अब डिजिटल प्लेटफार्म पर बहुत सारे गेम भी आने लगे हैं जिनमें टास्क पूरे करने होते हैं। और बच्चे इससे बहुत प्रभावित भी हो रहे हैं।
फिर कई ऐसे मामले भी देखने में आते हैं जब ई-गेमिंग की लत की वजह से बच्चा बहुत ही असामान्य व्यवहार करने भी लगता है।
और इससे पेरेंट्स काफी ज्यादा परेशान भी हो जाते हैं। और फिर ऐसे में ट्रीटमेंट ही उनके पास एक तरीका बचता है।
और ऑनलाइन गेमिंग की लत किस तरह से आपके बच्चे के स्वास्थ्य को नुकसान भी पहुंचा रही है और माता-पिता कैसे इससे निपट भी सकते है।
साथ ही ई-गेमिंग या ऑनलाइन गेम…आज के टाइम में टीनएज से लेकर युवाओं और कम उम्र के बच्चों को भी घंटों इसमें लगे भी देखा जाता है।
और इससे खराब पोस्चर, मसल्स में दर्द जैसी समस्याएं तो होती ही हैं। और इसके अलावा बच्चों में टास्क कंप्लीट करने का प्रेशर से लेकर वर्चुअल वर्ल्ड में ही खोए रहना जैसी कई दिक्कतें होने भी लगती हैं।
फिर आजकल बच्चों में ऑनलाइन गेम खेलने का शौक आम है, लेकिन परेशानी तब शुरू होती है। और जब ये असल जिंदगी पर भारी पड़ने भी लगे।
फिर कई बार ऐसा होता है, गेम उनकी जिंदगी का इतना बड़ा हिस्सा भी बन जाता है। कि वो पढ़ाई, नींद, परिवार और यहां तक कि दोस्तों से भी दूरी बढ़ाने लगते हैं और घंटों बस स्क्रीन पर ही बिताते भी रहते हैं।
इसके अलावा डॉक्टर सारस प्रसाद का कहना है कि माता-पिता को चाहिए कि वो बच्चों को केवल गेम खेलने से रोकने की कोशिश भी न करें।
और इससे वो आक्रामक भी हो सकते हैं। फिर इसकी बजाय उन्हें समझने की कोशिश भी करनी चाहिए कि वे गेम में इतना समय क्यों बिता रहे हैं।
और इसके बाद बच्चों से डांटकर नहीं बल्कि प्यार से बात करें। फिर उनका रूटीन क्या है इस पर भी खास ध्यान दें।
और ऑनलाइन गेम की जगह उन्हें खेलकूद व दूसरी फिजिकल एक्टिविटी के लिए प्रोत्साहित भी करें। और इससे उनका मन बाकी चीजों में लगेगा तो वो स्क्रीन की तरफ कम आकर्षित भी होंगे।