दुधवा टाइगर रिजर्व के बफरजोन के साथ ही दक्षिण खीरी के महेशपुर और गोला रेंज में भी बाघ-तेंदुओं की आवाजाही लगातार बढ़ती जा रही है. इससे यहां बस्तियों में रहने वालों की चिंता लगातार बढ़ती जा रही है. अकेल बफरजोन में करीब 300 तेंदुओं की मौजूदगी बताई जा रही है. कई घटनाओं में तेंदुए घरों के भीतर घुसकर बच्चों, बड़ों और मवेशियों को अपना शिकार बना चुके हैं.
बीती 9 जुलाई की शाम खम्भारखेड़ा में 6 वर्षीय बच्ची को तेंदुआ घर से उठा ले गया था. इसके बाद चार अगस्त को शीतलापुर के मैनीपुरवा निवासी 60 वर्षीय सोमवती को भी तेंदुआ रात में घर की गैलरी से उठा ले गया. सुबह उनका अधखाया शव बरामद हुआ. इससे पहले भी कई घटनाएं हो चुकी हैं. रिपोर्ट के अनुसार 27 अप्रैल को फुटहा फार्म निवासी 7 वर्षीय सिमरन को तेंदुआ खाना खाते समय उठा ले गया था. सहिजना और सिधौना गांव में भी तेंदुए घरों में घुसकर शिकार कर चुके हैं. लगातार बढ़ रहे मूवमेंट के बीच बाघ मित्रों के पास ग्रामीणों की शिकायतें अधिक आ रही हैं.
शाम ढलते ही ग्रामीणों की चिंता बढ़ रही
वन विभाग ने 10 माह में 22 तेंदुओं को रेस्क्यू कर एक रिकार्ड बनाया है, लेकिन लगातार तेंदुए आबादी इलाके में घुसपैठ कर रहे हैं. जंगल से सटे गांवों में शाम होते ही लोगों की चिंता बढ़ जा रही है. इस वजह से उत्तर व दक्षिण निघासन, धौरहरा और पलिया रेंज में एक दर्जन से अधिक पिंजरे लगाए गए हैं.
अंधेरा होते ही तेंदुए का मूवमेंट बढ़ा है. सभी रेंजों से आवश्यक संसाधनों के प्रस्ताव मांगे गए हैं. 1108 गांवों में सोलर लाइट लगाने का प्रस्ताव भी इसी दिशा में तैयार किया गया है. लाइट लगने के बाद आबादी की ओर वन्यजीवों के आने की घटनाओं में कमी आने की उम्मीद है. कीर्ति चौधरी, दुधवा के उप निदेशक

