न्यूज़लिंक हिंदी। राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (NCERT) की एक उच्चस्तरीय समिति ने सिफारिश की है कि सामाजिक विज्ञान की पाठ्यपुस्तकों में रामायण और महाभारत जैसे महाकाव्यों को शामिल किया जाना चाहिए। इसके साथ ही समिति के अध्यक्ष सीआइ आइजैक ने कहा कि कक्षाओं की दीवारों पर संविधान की प्रस्तावना लिखी जानी चाहिए। पिछले साल गठित सात सदस्यीय समिति ने सामाजिक विज्ञान के लिए कई सिफारिश की हैं, जो नई एनसीईआरटी पाठ्यपुस्तकों के विकास की नींव रखने के लिए एक महत्वपूर्ण निर्देशात्मक दस्तावेज है।

NCERT Social Science के सिलेबस में बदलाव
स्कूलों मे पढ़ाए जाने वाले सोशल साइंस के सिलेबस को संशोधित करने के लिए टीम गठित की गई है। NCERT की सोशल साइंस कमेटी ने किताबों में इंडियन नॉलेज सिस्टम, वेदों और आयुर्वेद को शामिल करने की बात कही है। इसके अलावा पैनल ने इतिहास को चार अवधियों में वर्गीकृत करने की सिफारिश की है। अब तक किताबों में इतिहास को तीन भागों में पढ़ाया जाता था। इसमें प्राचीन, मध्यकालीन और आधुनिक भारत सेक्शन शामिल हैं। पैनल की सिफारिश पर इतिहास को चार भागों- प्राचीन काल, मध्यकालीन काल, ब्रिटिश युग और आधुनिक भारत में बांटने की बात कही जा रही है।
ये भी पढ़े : VIDEO : ‘कोई माई का लाल पैदा नहीं हुआ’, अकबरुद्दीन ओवैसी ने पुलिस इंस्पेक्टर से की बदसलूकी
भारतीय राजवंशों की पढ़ाई
नई एजुकेशन पॉलिसी (NEP 2020) के आधार पर एनसीईआरटी के सिलेबस में बदलाव की बात कही जा रही है। इसमें यह भी प्रस्ताव दिया गया है कि NCERT Textbooks में केवल एक या दो के बजाए भारत मे शासन करने वाले सभी राजवंशों को शामिल किया जाए।
इसी कड़ी में रामायण और महाभारत से जुड़े चैप्टर्स शामिल किए जाने चाहिए। कक्षा 7वीं से लेकर 12वीं तक के सिलेबस में बदलाव होने जरूरी हैं। पैनल का कहना है कि किशोरावस्था में छात्र अपने राष्ट्र के लिए आत्म-सम्मान, देशभक्ति और गौरव का निर्माण करते हैं। हर साल हजारों छात्र देश छोड़कर दूसरे देशों में नागरिकता चाहते हैं क्योंकि उनमें देशभक्ति की कमी है। देशभक्ति बनाए रखने के लिए सिलेबस में बदलाव जरूरी है।
ये भी पढ़े : Bhumi Pednekar को हुआ डेंगू, अभिनेत्री ने अस्पताल से तस्वीरें साझा कर बताया हाल
NCERT की ओर से नहीं आया फैसला
हालांकि, अभी तक एनसीईआरटी की ओर से इन सिफारिशों पर कोई आधिकारिक फैसला नहीं लिया गया है। सामाजिक विज्ञान की किताबों में रामायण और महाभारत के चैप्टर को जोड़ने की सिफारिश करते हुए समिति के अध्यक्ष सी आई इसाक का कहना है कि छात्र किशोरावस्था में अपने आत्मसम्मान, देशभक्ति और अपने राष्ट्र के लिए गौरव का निर्माण करते हैं।

