महाराणा प्रताप चैरिटेबल फाउंडेशन के अध्यक्ष धीरेंद्र प्रताप सिंह को अगवा कर लिया गया। फिर उनकी गोली मारकर हत्या कर दी गई।
और फिर शव को दुबग्गा इलाके में किसान पथ के पास नहर में फेंक दिया गया। फिर पुलिस ने इस मामले में चालक रवि तिवारी व उसके साथी दिलीप समेत छह लोगों को हिरासत में लिया है।
और वहीं, एसटीएफ की टीम भी मामले की जांच कर रही है। फिर पुलिस हत्याकांड में प्रॉपर्टी व रुपये के लेनदेन समेत महिला से जुड़े बिंदुओं पर कर रही है।
और फिर उन्नाव के राजेपुर बांगरमऊ निवासी धीरेन्द्र प्रताप सिंह वर्तमान में सेक्टर-11 वृंदावन योजना, पीजीआई में रहते थे।
फिर शनिवार शाम घर से निकलने के बाद वह देर रात तक वापस नहीं पहुंचे। और रात करीब एक बजे तक घर न पहुंचने पर पत्नी ममता ने उनके मोबाइल पर फोन किया।
फोन चालक रवि ने उठाया और बताया कि साहब सुशांत गोल्फ सिटी स्थित फीनिक्स पलासियो माल में बैठे हैं।
फिर इसके बाद धीरेन्द्र और चालक के मोबाइल बंद हो गए। अनहोनी की आशंका पर परिजन ने तलाश भी शुरू की।
और इसी बीच रात करीब 2:30 बजे चालक रवि खुद सुशांत गोल्फ सिटी थाने पहुंचा। फिर वहां धीरेन्द्र के लापता होने की शिकायत दर्ज कराई।
फिर इसी बीच थाने पहुंची उनकी पत्नी ममता सिंह ने चालक पर संदेह जाहिर किया। और पुलिस ने रवि से पूछताछ शुरू की तो वह पहले टालमटोल करता रहा।
सख्ती से पूछताछ में उसने साथियों के साथ मिलकर अपहरण और हत्या की बात कुबूल कर ली।
इसके साथ ही डीसीपी दक्षिणी मो. मुस्ताक के मुताबिक शुरुआती जांच में सामने आया कि धीरेन्द्र की फार्च्यूनर में गोली मारकर हत्या भी की गई।
फिर उनके माथे और सीने में एक-एक गोली लगी है। और हत्या के बाद शव को किसान पथ के पास नहर में फेंक दिया गया था।
चालक की निशानदेही पर पुलिस ने शव बरामद कर पोस्टमार्टम के लिए भेजा। और पोस्टमार्टम रिपोर्ट से मौत का स्पष्ट कारण और गोली लगने से संबंधित अन्य तथ्य भी सामने आएंगे।
इसके अलावा डीसीपी दक्षिण मोहम्मद मुस्ताक के मुताबिक पूछताछ में उन्नाव की जमीन को लेकर विवाद और रुपये के लेन-देन की बात सामने आई है।
और इस जमीन की कीमत करीब 50 करोड़ भी बताई जा रही है। फिर पुलिस हत्या के पीछे प्रॉपर्टी विवाद को मुख्य वजह मान कर ही जांच कर रही है।
फिर छह पुलिस टीमों के साथ एसटीएफ भी घटना की कड़ियां भी जोड़ रही है। पुलिस के मुताबिक धीरेंद्र का अपहरण शाम पांच बजे किया गया था।
उनकी हत्या करने के बाद शव करीब 20 किलोमीटर दूर दुबग्गा में किसान पथ के पास नहर में फेंक दिया।
और इस मामले में पुलिस कमिश्नरेट ने उन्नाव पुलिस से भी संपर्क किया। वहां से भी जानकारी भी जुटाई जा रही है।
इसके साथ ही पुलिस ने आरोपी रवि द्वारा बताए गए समय के आधार पर प्लासियो मॉल का सीसीटीवी फुटेज खंगाला।
फिर जांच के दौरान पुलिस को न तो धीरेंद्र प्रताप सिंह के मॉल में आने का कोई फुटेज भी मिला और न ही उनकी गाड़ी के वहां पहुंचने की तस्वीर भी सामने आई।
और मॉल के सीसीटीवी में धीरेंद्र या उनकी गाड़ी की मौजूदगी नहीं मिलने से पुलिस का शक गहराने भी लगा।
फिर रवि की बताई कहानी और जांच में सामने आ रही जानकारी के बीच अंतर मिलने के बाद ही पुलिस ने उससे कड़ाई से पूछताछ शुरू की। और पूछताछ में पुलिस को मामले की दिशा बदलने वाली जानकारी मिली।
साथ ही रवि के जवाबों में विरोधाभास सामने आने के बाद ही पुलिस ने उससे लगातार पूछताछ की। और फिर आखिरकार आरोपी ड्राइवर ने पूरी घटना कबूल भी कर ली।
इसके अलावा डीसीपी दक्षिणी मोहम्मद मुश्ताक ने ये भी बताया कि हिरासत में लिये गये संदिग्धों से पूछताछ भी की जा रही है।
फिर अभी तक की जांच में उन्नाव के एक जमीन को लेकर ही विवाद का मामला सामने आया है। फिर वहीं, रुपये के लेनदेने की भी बात सामने आई है।
और हत्या के पीछे प्रॉपर्टी विवाद ही कारण भी माना जा रहा है। फिर वारदात के खुलासे के लिए छह टीमें भी लगाई गईं हैं।