UP News : भाजपा,सपा -बसपा के रण -कौशल का इम्तेहान,उम्मीदवारों की राह में बिछे हुए नाराजगी के कांटे

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न्यूज़लिंक हिंदी। भाजपा,सपा -बसपा के रण -कौशल का इम्तेहान का अब खेल हैं। राजधानी लखनऊ की ग्रामीण लोकसभा सीट मोहनलालगंज के न केवल समीकरण अलग हैं, मिजाज और अंदाज भी अलग हैं। लगभग 35.78 फीसदी दलित आबादी वाली यह सीट 1962 में अस्तित्व में आने के बाद से अब तक अनुसूचित जाति के लिए सुरक्षित है।

इस बार प्रत्याशियों की राह में जगह-जगह नाराजगी के कांटे लगातार बिछे हुए हैं। ऐसे में सभी के रणकौशल का इम्तिहान है। बहरहाल, भाजपा हैट्रिक लगाने को बेताब है, तो 1998 से 2009 तक लगातार चार बार जीत का स्वाद चख चुकी सपा पांचवीं जीत के लिए बेकरार है।

वहीं, लगातार चार बार चौथे स्थान पर रहने वाली बसपा भी खाता खुलने की उम्मीद में पूरा जोर जमकर लगा रही है। लगातार दो बार भगवा परचम फहरा चुके केंद्रीय राज्यमंत्री कौशल किशोर को पार्टी ने फिर से मैदान में मुख्य रूप से उतारा है। वे मलिहाबाद सीट से 2002 में निर्दलीय विधायक भी रहे थे।

सपा प्रत्याशी आरके चौधरी बसपा के संस्थापक सदस्यों में भी मुख्य रूप से शामिल रहे हैं। बसपा सरकार में चार बार मंत्री भी रहे चुके हैं । मोहनलालगंज विधानसभा सीट से भी चौधरी बसपा के टिकट और एक बार भाजपा के समर्थन से निर्दलीय विधायक रह चुके हैं। फैजाबाद में जन्मे चौधरी मोहनलालगंज लोकसभा सीट पर तीन बार अपनी किस्मत आजमां चुके हैं।

बसपा प्रत्याशी राजेश कुमार उर्फ मनोज प्रधान मोहनलालगंज क्षेत्र के ही मुख्य निवासी हैं। ऐसे में मतदाता इन सभी से भली-भांति परिचित भी हैं। इसी वजह से समर्थन और नाराजगी का भी एक अलग स्तर रहा है। आगरा एक्सप्रेसवे के किनारे बसे सरोजनीनगर विधानसभा क्षेत्र के माधवपुर और आसपास के क्षेत्रों में प्लाॅटिंग बहुत ही तेजी से चल रही है।

लोगों के पास मिले मुआवजे और निजी बिल्डरों को जमीन बेचने से खासा बैंक बैलेंस भी बना हुआ है। वोट देने के लिए यहां मुद्दे से ज्यादा बिरादरी और पार्टी अहम है। इसी विधानसभा सीट के तहत कानपुर रोड के करीब बसे हिंदनगर निवासी सुरेश कुमार के अनुसार हमें फर्क नहीं पड़ता कि प्रत्याशी कौन है। हम तो मोदी को ही वोट करेंगे।

रोजगार की दिक्कत,मोहनलालगंज क्षेत्र के निगोहां गांव निवासी आशीष दीक्षित, कृष्ण मोहन बाबूलाल पाल के अनुसार क्षेत्र में शहरीकरण बहुत ही तेजी से हो रहा है। निजी बिल्डरों ने जमीन की कीमतें और भी ज्यादा बढ़ा दी हैं। गांव के ही छात्र आशुतोष के अनुसार क्षेत्र में एक भी सरकारी डिग्री कॉलेज नहीं होना, यहां का बहुत बड़ा मुद्दा है।

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