डब्ल्यूडब्ल्यूएफ के सर्वे में यूपी में मिला कछुओं का खजाना, कई प्रजातियां एक जगह मौजूद

डब्ल्यूडब्ल्यूएफ (वर्ल्ड वाइड फंड फॉर नेचर) के सर्वे में कछुओं की प्रजातियों और उनकी उपस्थिति के बारे में जानकारी हुई।

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प्रतीकात्मक फोटो।

उत्तर प्रदेश के बरेली में पहला कछुआ संरक्षण क्षेत्र विकसित हो रहा है। यहां कई किस्म के कछुए एक जगह पर्यटक देख सकेंगे। मीरगंज क्षेत्र के गोला नदी के किनारे वेटलैंड में पहले से 1 हजार से अधिक कछुआ मौजूद हैं। यहां सॉफ्टशेल कछुओं के साथ ही ट्राइनॉक्स और जियोचेलोन एलिगेंस प्रजातियों के कछुए मौजूद हैं।

डब्ल्यूडब्ल्यूएफ (वर्ल्ड वाइड फंड फॉर नेचर) के सर्वे में कछुओं की प्रजातियों और उनकी उपस्थिति के बारे में जानकारी हुई। जिसके बाद सूबे के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर कछुओं को संरक्षित करने के लिये वेटलैंड विकसित हो रहा है। यह प्रस्तावित कछुआ संरक्षण क्षेत्र करीब 15 हेक्टेयर में फैला है। इस क्षेत्र को कछुआ संरक्षण के लिए विज्ञान आधारित तरीके से विकसित करेगा।

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डब्ल्यूडब्ल्यूएफ की योजना है कि कछुओं के प्राकृतिक आवास को संरक्षित करते हुए स्थानीय ग्रामीणों को भी पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक किया जाए। इसके लिए उन्हें प्रशिक्षण, सहभागिता और वैकल्पिक आजीविका के अवसर भी मुहैया कराए जाएंगे। इस पहल से जैविक संरक्षण के साथ-साथ सामुदायिक सहभागिता भी सुनिश्चित होगी। डब्ल्यूडब्ल्यूएफ ने वेटलैंड में गांवों से बहने वाले गंदे पानी की रोकथाम के लिए भी विशेष योजना तैयार की है। जल शुद्धिकरण की तकनीक अपनाकर वेटलैंड के प्राकृतिक जल स्रोतों को सुरक्षित रखा जाएगा।

इको टूरिज्म के रूप में होगा विकसित
अगले छह महीने में कछुआ संरक्षण रिजर्व पूरी तरह से तैयार कर लिया जाए। इसके बाद इसे इको-टूरिज्म केंद्र के रूप में भी विकसित किया जाएगा, जिससे पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा और स्थानीय लोगों को रोजगार के अवसर प्राप्त होंगे। इस परियोजना से न सिर्फ कछुओं का संरक्षण होगा बल्कि बरेली को पर्यावरणीय पर्यटन के नए नक्शे पर भी स्थान मिलेगा।

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