Air Polluction: दिल्ली-NCR के अधिकतर शहरों में एक्यूआई 300 पार, हवा अब भी बेहद खराब

दिल्ली में अक्तूबर और नवंबर में भारी प्रदूषण के लिए पंजाब और हरियाणा में पराली जलाने को जिम्मेदार माना जाता है। इस महीने अब तक दिल्ली और आसपास के इलाकों में वायु गुणवत्ता बेहद खराब स्थिति में रही है।

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न्यूज़लिंक हिंदी। राजधानी दिल्ली और आसपास के इलाकों में एक दिन पहले के मुकाबले हवा कुछ ज्यादा ही खराब हो गई है। गुरुग्राम को छोड़कर दिल्ली समेत एनसीआर के सभी प्रमुख शहरों में हवा की गुणवत्ता बेहद खराब श्रेणी में है, और सूचकांक 300 के पार बना हुआ है। आने वाले दिनों में इससे कोई बड़ी राहत भी नहीं मिलने वाली है।

केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के सोमवार शाम चार बजे जारी बीते 24 घंटे के औसत आंकड़ों के अनुसार, दिल्ली में वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 348 दर्ज किया गया। वहीं, फरीदाबाद में यह 329, गाजियाबाद में 321, ग्रेटर नोएडा में 318 और नोएडा में 331 रहा। यह सभी आंकड़े बहुत खराब श्रेणी वाले हैं। गुरुग्राम में जरूर एक्यूआई 300 से नीचे 261 दर्ज किया गया जो खराब श्रेणी में आता है। विभाग के मुताबिक, कुछ दिन में हवा की गुणवत्ता में अधिक सुधार की संभावना भी नहीं है।

राजधानी में वायु की दिशा बदलने व गति कम होने से सांसों पर संकट बरकरार है। दो दिन से हवा बेहद खराब श्रेणी में स्थिर है। सोमवार को दिल्ली का वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 348 दर्ज किया गया, जोकि बेहद खराब श्रेणी है। यह रविवार के मुकाबले 29 सूचकांक ज्यादा है।

एनसीआर के शहरों में दिल्ली की हवा सबसे प्रदूषित रही। सुबह के समय हवा कोहरा छाया नजर आया। ऐसे में इस दौरान एक्यूआई खराब श्रेणी में पहुंचा। जैसे-जैसे दिन चढ़ता गया वैसे ही प्रदूषण बढ़ता गया। विशेषज्ञों का कहना है कि तापमान में जैसे-जैसे गिरावट आएगी, वैसे ही हवा की गति कम होने से वातावरण में फैले प्रदूषक कण और संघन होंगे।

एनजीटी की पंजाब सरकार को फटकार
राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने प्रदूषण और पराली जलाने के बढ़ते मामलों पर पंजाब सरकार को फटकार लगाई है। अधिकरण ने सोमवार को राज्य सरकार से पूछा कि पराली जलाने पर तत्काल रोक लगाने के सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद कैसे पराली जलाई जा रही है। शीर्ष अदालत के आदेश का पालन करने में नाकाम रहने के लिए राज्य सरकार की आलोचना भी की।

एनजीटी और सुप्रीम कोर्ट इस मामले पर विचार कर रहे हैं
एनजीटी ने पराली जलाने पर रोक लगाने के लिए राज्य सरकार की तरफ से उठाए गए कदमों पर भी असंतोष जताया। अधिकरण ने कहा, यह आपके प्रशासन की पूर्ण विफलता है। पूरा प्रशासन काम पर लगा हुआ है और फिर भी आप असफल हैं। जब यह मामला उठाया गया था, तब पराली जलाने की लगभग 600 घटनाएं दर्ज की गई थीं। अब यह संख्या 33,000 हो गई है, जबकि एनजीटी और सुप्रीम कोर्ट इस मामले पर विचार कर रहे हैं और आप कह रहे हैं कि आप इसे रोकने के प्रयास कर रहे हैं। एजेंसी

पंजाब सरकार गंभीर नहीं
पंजाब सरकार के वकील से आगे सवाल करते हुए एनजीटी ने कहा, लगता है कि आपका नारा ‘कृपया घुटते रहो’ है। शायद आपका राज्य समस्या की गंभीरता को नहीं समझता। प्रमुख योगदान आपके राज्य का है। गौरतलब है कि दिल्ली में अक्तूबर और नवंबर में भारी प्रदूषण के लिए पंजाब और हरियाणा में पराली जलाने को जिम्मेदार माना जाता है। इस महीने अब तक दिल्ली और आसपास के इलाकों में वायु गुणवत्ता बेहद खराब स्थिति में रही है।

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भारतीय उष्णदेशीय मौसम विज्ञान संस्थान के मुताबिक
सोमवार को हवाएं उत्तर-पश्चिम दिशा की ओर से चलीं। गति आठ किमी प्रतिघंटा रही। मंगलवार को हवाएं उत्तर-पश्चिम से चलने का अनुमान है। हवा बेहद खराब श्रेणी में बनी रहेगी। बृहस्पतिवार को हवाएं पूर्व की दिशा से चल सकती हैं। हवा की गति 8 किमी प्रतिघंटे रहने की संभावना है।

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