Kanpur: भीतरगांव में बुखार से पांच दिन में तीन की हुई मौत, 250 से ज्यादा लोग हुए बीमार

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कानपुर में मौसमी उतार-चढ़ाव से वायरल का संक्रमण बहुत ही ज्यादा तेज हो गया है। और फिर बच्चों और युवाओं में कंजंक्टिवाइटिस के रोगी बढ़ गए।

फिर इसके साथ ही बुखार और वायरल डायरिया के रोगी बढ़े हैं। और फिर ज्यादातर बुखार के रोगी को गले का संक्रमण है। वायरल निमोनिया से एक रोगी की मौत हो गई।

और आठ रोगियों का गंभीर हालत में इलाज चल रहा है। और फिर हैलट के नेत्र रोग विभाग की ओपीडी में कंजंक्टिवाइटिस के 26 रोगी आए।

और फिर विभागाध्यक्ष डॉ. परवेज खान ने बताया कि रोगी अचानक बढ़े हैं और देर से ठीक हो रहे हैं। संक्रमण तेजी से फैल रहा है।

और फिर वहीं, मेडिसिन की ओपीडी में सबसे अधिक रोगी वायरल फीवर और डायरिया के हैं।

कल्याणपुर के निजी अस्पताल में भर्ती रावतपुर निवासी अच्छन को वायरल फीवर के बाद निमोनिया भी हो गया। और फिर सोमवार दोपहर उसे कल्याणपुर के निजी अस्पताल से हैलट रेफर भी किया गया।

इसके साथ ही रोगी के भाई दीपू ने बताया कि डॉक्टरों ने कहा कि निमोनिया हो गया वेंटिलेटर की जरूरत है। हैलट ले जाओ, यहां पहुंचते ही मौत हो गई।

मेडिसिन के प्रोफेसर डॉ. जेएस कुशवाहा ने ये भी बताया कि रोगियों को गले का संक्रमण हो रहा है। और फिर सांस फूलने का लक्षण भी मिल रहे हैं।

वायरल निमोनिया के रोगियों को इमरजेंसी में भर्ती भी किया जा रहा है। पहले से किसी रोग से पीड़ितों को संक्रमण तेजी से पकड़ भी रहा है।

और फिर भीतरगांव बरुई अकबरपुर गांव में लगभग एक महीने से बुखार ने पांव पसार रखा है।

फिर पांच दिन के अंदर प्रधान की पत्नी समेत तीन लोगों की मौत हो गई है। और करीब 250 लोग बुखार की चपेट में हैं।

गांव में नालियां चोक होने से जलभराव और गंदगी है। और फिर ग्रामीणों के मुताबिक गंदगी के चलते बुखार का प्रकोप भी फैला है।

बरूई-अकबरपुर गांव में एक माह से बुखार फैला है। और फिर इस बीच भीतरगांव सीएचसी के चिकित्साधीक्षक के नेतृत्व में दो बार शिविर लगाकर मरीजों का इलाज भी किया गया।

लेकिन फिर इसके बाद भी बुखार के मरीज कम नहीं हुए। और फिर ग्रामीणों की मानें तो गांव में डेंगू के कई मरीज हैं, जिनका कानपुर के निजी अस्पतालों में इलाज भी हो रहा है।

और फिर बुखार की चपेट में आकर गुरुवार को प्रियांशी साहू, रविवार को ग्राम प्रधान सतीश मिश्रा की पत्नी करुणा मिश्रा और सोमवार को राम स्वरूप की मौत हो गई।

साथ ही चिकित्साधीक्षक डाॅ. मनीष तिवारी ने ये भी बताया कि एंबुलेंस से मरीजों को भीतरगांव अस्पताल आने के लिए कई बार भी कहा गया है, लेकिन कोई नहीं आ रहा है। और फिर गांव में फिर शिविर लगाकर इलाज भी किया जाएगा।

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