राष्ट्रीय शर्करा संस्थान के परिसर में ही 722 हरे पेड़ों की अवैध कटान के मामले में केंद्र सरकार ने बड़ी कार्रवाई करते हुए ही संस्थान की निदेशक डॉ. सीमा परोहा और संपदा अधिकारी विनय कुमार को निलंबित भी कर दिया गया है।
और फिर उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्रालय के आदेश पर की गई इस कार्रवाई के बाद ही चीनी एवं वनस्पति तेल निदेशालय के निदेशक अरविंद कुमार रावत को एनएसआइ निदेशक का अतिरिक्त प्रभार भी सौंपा गया है।
और फिर वन विभाग की जांच में एनएसआइ परिसर में 722 पेड़ों की कटान का मामला सामने भी आया था।
फिर ये भी आरोप है कि इनमें नीम, शीशम, गोल्ड मोहर, यूकेलिप्टस, जंगल जलेबी, कंजी और अन्य प्रजातियों के पेड़ शामिल भी थे।
फिर जांच में 377 पेड़ों की ठूंठ मिलीं, जिन्हें पिछले छह माह के दौरान काटा भी गया।फिर जांच में सामने आया कि पेड़ों की लकड़ियां परिसर से बाहर भेजी गईं।
जबकि सरकारी संपत्ति होने के कारण उनकी बिक्री से प्राप्त धनराशि राजकोष में जमा कराना अनिवार्य भी है।
और फिर मामले की विस्तृत जांच उप प्रभागीय वन अधिकारी आशीष जैन को सौंपी भी गई है।
फिर इस संबंध में डॉ. सीमा परोहा का कहना है कि वह जांच में पूरा सहयोग भी कर रही हैं ।
और विभागीय प्रक्रिया का सम्मान भी करती हैं। फिर वहीं विनय कुमार को फोन मिलाया गया लेकिन उन्होंने रिसीव भी नहीं किया।
इसके साथ ही 27 मई को क्षेत्रीय वन अधिकारी जांच करने के लिए एनएसआइ पहुंचे थे तो सुरक्षाकर्मियों ने ये भी बताया कि निदेशक की अनुमति के बगैर ताला भी नहीं खोला जाएगा। फिर इसके बाद ही टीम बगैर जांच किए लौट भी गई थी।
इसके साथ ही 29 मई को परिसर में जांच न हो पाने पर वन विभाग ने उप प्रभागीय वन अधिकारी की अध्यक्षता में ही अब 30 मई को कमेटी का गठन भी किया।
फिर टीम ने दो जून को ही एनएसआइ की निदेशक से मुलाकात भी की। और फिर निदेशक टीम के साथ ही खुद काटे गए पेड़ों वाले स्थान पर गईं।