हेपेटाइटिस सी की जांच खून के साथ ही अब लार से भी हो सकेगी। फिर घर में ही खुद जांच करके पांच मिनट से भी कम समय में रिपोर्ट देखी जा सकेगी।
और फिर कानपुर, लखनऊ, प्रयागराज और गोरखपुर तथा मिजोरम के राजकीय मेडिकल कॉलेजों के गैस्ट्रोइंटरोलाजी के डॉक्टरों ने मिलकर एक जांच किट तैयार की है।
इसके साथ ही शुगर मापने की मशीन की तरह घर पर ही जांच करने में सक्षम मशीन के तीन ट्रायल पूरे हो चुके हैं।
फिर इसमें 98 प्रतिशत तक परिणाम आए हैं। इसके साथ ही जीएसवीएसएस पीजीआइ के 550 हाई रिस्क मरीजों में 98 प्रतिशत तक सटीक परिणाम भी मिले हैं।
और फिर हेपटाइटिस सी की समय से पहचान और इलाज हो जाने से इसकी गंभीरता को रोका भी जा सकता है।
फिर जो लोग खून के सैंपल देने में हिचकिचाते भी हैं, वह डाक्टरों के सुझाव पर इस किट से घर में ही जांच भी कर सकेंगे।
और फिर रिपोर्ट के आधार पर इलाज शुरू हो सकेगा। फिर यह बाजार में कब तक आएगी और कीमत क्या होगी, इस पर निर्णय भी होना बाकी है।
फिर इसमें कई ऐसे मरीज मिले, जिन्हें पता ही नहीं था कि वे हेपेटाइटिस से संक्रमित हैं। और विशेष प्रकार की किट रोगी की गोपनीयता और आसान जांच के लिए सबसे उपयुक्त साबित भी हुई है।
फिर इसकी मदद से जल्द ही हेपेटाइटिस मरीजों की स्क्रीनिंग शुरू की जा सकेगी। और जीएसवीएसएस पीजीआइ के गैस्ट्रोइंटरोलाजी विभागाध्यक्ष डा. विनय कुमार ने ये भी बताया कि हेपटाइटिस सी एक वायरस जनित बीमारी है।
फिर जिसका अगर समय से पहचान और इलाज हो जाने से इसकी गंभीरता को रोका भी जा सकता है।
फिर इसकी पहचान में देरी से हेपटाइटिस सी की वजह से लिवर सिरोसिस, लिवर कैंसर होने की संभावना भी होती है।
फिर इसके लक्षण नहीं दिखने के कारण शुरुआती चरण में इस बीमारी का पता लोगों को नहीं लगता है।
और फिर इस किट की मदद से घर पर ही लोग जांच कराकर पांच मिनट से भी कम समय में इसकी रिपोर्ट भी खुद देख सकेंगे।
फिर आगे उन्होंने ये भी बताया कि किट तैयार करने का उद्देश्य कम समय में गोपनीय रूप से बीमारी का पता लगाना है। फिर जिससे जो लोग खून की जांच कराने में कतराते भी हैं।
फिर वे भी आसानी से घर पर ही बीमारी का पता लगाकर इलाज शुरू करा सकते हैं। फिर इस किट में खून की जांच के बराबर ही परिणाम भी प्राप्त हो रहे हैं।