मुर्गी पालन के व्यवसाय में अब बढ़िया मुनाफा होता है। और फिर इसलिए बेरोजगार युवाओं की यह पहली पसंद बन रही है।
साथ ही नर्मदा निधि नस्ल की मुर्गी को काफी पसंद किया जा रहा है, इसकी वजह यह बताई जा रही है।
इसके लालन-पालन में बहुत ज्यादा मेहनत करने की जरूरत नहीं पड़ती है और ये मशीन की तरह अंडे भी देती है।
साथ ही स्थानीय ग्रामीण विक्की गुप्ता बताते हैं, युवाओं के बीच इन दिनों मुर्गी पालन का क्रेज गजब बढ़ रहा है।
और फिर बड़ी संख्या में युवा इस व्यवसाय में एंट्री कर रहे हैं। और अच्छा-खासा पैसा भी कमा रहे हैं, जो एक बार इस व्यवसाय को शुरू कर दिया है।
फिर वह लगातार व्यवसाय में बढ़ोतरी कर रहा है। और इस बिजनेस में बढ़िया फायदा भी होता है और ज्यादा परेशानी भी नहीं होती है।
फिर इसकी डिमांड भी अच्छी खासी बनी रहती है। और इसको बेचने के लिए परेशान भी नहीं होना पड़ता है।
फिर इतना ही नहीं मुर्गी पालकों के बीच नर्मदा निधि मुर्गी की बहुत डिमांड है। क्योंकि इसे बैकयार्ड पोल्ट्री में भी पाला जा सकता है।
और बैकयार्ड पोल्ट्री मतलब, जो घर के पीछे थोड़ी सी जगह बची रहती है, वहीं पर यह मुर्गी अपना जीवन यापन कर सकती है।
और फिर बर्तन धोने से जो दाना बचता है या कीड़े मकोड़े होते हैं उन्हीं को खाकर यह जिंदा भी रह सकती है।
इसके अलावा नर्मदा निधि किस्म के मुर्गे, देसी मुर्गियों की तुलना में जल्दी ग्रोथ करता है, यह महज ढाई महीने में ही 800 से 900 ग्राम वजन प्राप्त भी कर लेते हैं।
और 140 दिनों में ही डेढ़ किलो वजन की हो जाती है। फिर ऐसे में इसका पालन करना किसानों के लिए फायदेमंद भी होता है।
साथ ही नर्मदा निधि डुअल पर्पज के लिए इस्तेमाल होता है। और फिर ये अंडे के साथ-साथ मांस के लिए भी उपयोग में लाया जाता है।
और फिर नर्मदा निधि प्रजाति की मुर्गी 170 से 190 अंडे प्रतिवर्ष देती है। जबकि देसी मुर्गी में केवल 45 से 50 अंडे ही प्रतिवर्ष मिलता है।
फिर यह कम समय में अधिक लाभ देती है। और फिर लोगों के बीच इसके मांस को लेकर भी अच्छी खासी डिमांड भी रहती है।