अल-नीनो को लेकर पूरी दुनियाभर की मौसम एजेंसियां अलर्ट भी जारी कर रही हैं। और हाल ही में अमेरिकी मौसम एजेंसी NOAA और कोलंबिया यूनिवर्सिटी के IRI ने दुनिया भर के मौसम को लेकर ही एक बेहद गंभीर चेतावनी भी जारी की है।
और फिर प्रशांत महासागर में एक खतरनाक ‘सुपर अल-नीनो’ पूरी तरह से एक्टिव भी हो चुका है।
साथ ही वैज्ञानिकों का कहना है कि अल-नीनो इस साल तो कहर मचाएगा ही साथ ही अगले साल के शुरुआती महीनों तक इसका असर भी रहेगा।
साथ ही NOAA के मुताबिक, अक्टूबर से दिसंबर 2026 के बीच इस अल-नीनो के अपने पीक पर ही पहुंचने की 81% संभावना भी शामिल है।
फिर कुछ मौसम एजेंसियों का ये तक कहना है कि दिसंबर तक समुद्र की सतह का तापमान सामान्य से भी 2.6°C से 3.0°C तक बढ़ सकता है।
और अगर ऐसा होता है, तो यह 1950 और 2015-16 में आए अब तक के सबसे भयंकर अल-नीनो को भी पीछे भी छोड़ देगा।
फिर भीषण गर्मी वाली ऐसी मौसमी घटनाओं को एक्सपर्ट्स ‘गॉडजिला अल-नीनो’ ही कहते हैं।और फिर दुनियाभर में इसका असर अभी से दिखने भी लगा है।
साथ ही सूखे की आशंका को देखते हुए ही पनामा नहर अथॉरिटी ने पानी बचाने के लिए जहाजों के ड्राफ्ट आकार में कटौती करना भी शुरू कर दिया है।
और फिर इस मौसमी बदलाव से लैटिन अमेरिका और कैरेबियाई देशों में बाढ़ का भी खतरा है।
तो वहीं भारत, ऑस्ट्रेलिया और दक्षिणी अफ्रीका में मॉनसून के कमजोर पड़ने और गंभीर सूखे की चेतावनी भी दी गई है। और फिर इससे ग्लोबल फूड सेफ्टी पर भी बड़ा संकट भी आ सकता है।
फिर मौसम विभाग के अनुसार, पश्चिम बंगाल, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड और गुजरात में एक ही दिन में 12 से 20 सेंटीमीटर तक भारी बारिश भी दर्ज की गई है।
और अब सवाल है आखिर ऐसा क्यों हो रहा है? एक्सपर्ट्स का कहना है कि अल-नीनो और भारतीय मॉनसून दोनों एक ही समय-चक्र पर काम भी नहीं करते।
फिर अल-नीनो ‘वॉकर सर्कुलेशन’ को मोड़कर पूरे सीजन में बारिश को दक्षिण एशिया से दूर भी ले जाता है।
लेकिन यह किसी एक हफ्ते की स्थानीय मौसम एक्टिविटी को पूरी तरह कंट्रोल भी नहीं कर सकता हैं।
और फिर भले ही देशभर में इन दिनों बारिश हो रही है, लेकिन इसका मतलब यह बिल्कुल भी नहीं है।
कि अल-नीनो की वजह से भीषण गर्मी या सूखे का खतरा भी टल गया है। और फिर बारिश की कमी ही रातों-रात पूरी भी नहीं होती, और अल-नीनो पूरे मौसम पर अपना असर भी डालता है।