अमेरिका और सऊदी अरब ने अब एक ऐतिहासिक समझौते पर पूर्ण हस्ताक्षर किए हैं।
फिर इसके साथ ही इस समझौते से खाड़ी का यह देश अपना नागरिक परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम विकसित भी कर सकेगा।
और फिर अमेरिकी ऊर्जा विभाग के अनुसार, यह शांतिपूर्ण परमाणु सहयोग समझौता भी बना हुआ है।
और फिर इसके तहत ही अब अमेरिकी कंपनियों को सऊदी अरब के परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम में बड़े पैमाने पर ही काम करने का अवसर भी मिलेगा।फिर इसके साथ ही समझौते का पूरा ब्योरा सार्वजनिक भी नहीं किया गया है।
लेकिन अमेरिकी मीडिया की रिपोर्टों के मुताबिक, भविष्य में ही अब इसके तहत सऊदी अरब को यूरेनियम संवर्द्धन की अनुमति भी मिल सकती है।
फिर इसके अलावा संवर्द्धित यूरेनियम का इस्तेमाल परमाणु बिजलीघरों के लिए ईंधन के रूप में ही किया जाता है।
फिर हालांकि, इसी तकनीक का उपयोग परमाणु बम बनाने के लिए भी किया जा सकता है।
इसके साथ ही विशेषज्ञों का कहना है कि यदि ऐसा होता है, तो यह अमेरिका की ओर से पहली बार ही होगा।
और फिर इससे पहले से ही अस्थिर पश्चिम एशिया में परमाणु हथियारों के प्रसार का खतरा भी बढ़ सकता है।
ये भी बता दें कि अमेरिकी ऊर्जा विभाग ने ये भी बताया कि परमाणु सहयोग समझौते के साथ एक द्विपक्षीय सुरक्षा निगरानी के तौर पर ही समझौते पर हस्ताक्षर किए गए हैं।