नेपाल में 26 अगस्त 2026 को तिब्बत सीमा पर ग्लेशियर टूटने के कारण आई विनाशकारी बाढ़ का पानी अब उतरने लगा है जो अपने पीछे तबाही के निशान भी छोड़ गया।
और फिर इस तबाही ने देश की जड़ें भी हिला दी हैं। और देश को सामाजिक-आर्थिक रूप से जो नुकसान हुआ है उससे उबरने में कितना समय लगेगा ये कहना बेहद ही मुश्किल है।
लेकिन, जिन 1,356 लोगों की मौत हुई उनके परिवार वाले शायद ही कभी उबर भी न पाएं।
और वैसे आंकड़ों की बात करें तो नेपाल के राष्ट्रीय आपदा जोखिम न्यूनीकरण और प्रबंधन प्राधिकरण ने करीब 387.5 अरब नेपाली रुपए यानी करीब 2.5 अरब अमेरिकी डॉलर के नुकसान का अनुमान भी लगाया है।
फिर जो देश की कुल जीडीपी का 15% होता है। फिर अब तक 1,356 लोगों की मौत भी हो चुकी है।
इसके साथ ही 5 हजार से ज्यादा लोग अभी भी लापता हैं। और 13,396 लोगों को इस बड़ी आपदा से रेस्क्यू टीम ने बचा भी लिया।
फिर यही नहीं, बाढ़ और भूस्खलन से नेपाल की 84,270 से अधिक की आबादी सीधे तौर पर प्रभावित भी हुई है। और इसमें करीब 32,000 बच्चे भी शामिल हैं।
फिर 55 किमी सड़क, 33 पुल पूरी तरह से नष्ट: नेपाल सरकार की ओर से नुकसान का प्रारंभिक आंकड़ा जो संसदीय समिति में पेश किया गया उसके अनुसार, बाढ़ के चलते नेपाल का चीन नाका से व्यापार एकदम बंद हो गया है।
दरअसल, बेत्रावती-रसुवागढ़ी सड़क 55 किलोमीटर तक पूरी तरह से नष्ट भी हो गई है। इससे व्यापार प्रभावित हुआ है और देश की कमाई पर बड़ा असर पड़ा है।
फिर इसके साथ ही गल्छी–देवीघाट मार्ग के 4 किलोमीटर हिस्से की सड़क को भी नुकसान पहुंचा है।
और इसी प्रकार से 10 किलोमीटर लंबी देवीघाट–त्रिशूली–बेत्रावती सड़क को भी क्षति पहुंची है। समिति की रिपोर्ट के अनुसार, आपदा ने 4 जिलों में 33 पुल पूरी तरह से नष्ट भी किए हैं।
और इसके अलावा 68 सस्पेंशन ब्रिज भी टूटे हैं। फिर परिवहन इन्फ्रास्ट्रक्चर को फिर से खड़ा करने के लिए नेपाल को 73.34 अरब नेपाली रुपए यानी करीब 48.033 करोड़ डॉलर की जरूरत भी होगी।