यमनी सरकारी बलों के पीछे हटने के बाद, अब यमन के हूती हथियारबंद गुट ने बाब अल-मंदेब स्ट्रेट के मुहाने पर स्थित रणनीतिक द्वीप मयून पर क़ब्ज़ा कर लिया है।
और फिर लाल सागर के समुद्री जलमार्ग पर हूती लड़ाकों का क़ब्ज़ा सऊदी अरब के तेल निर्यात को बुरी तरह प्रभावित भी कर सकता है।
फिर अमेरिका-ईरान युद्ध के दौरान लंबे समय तक होर्मुज़ स्ट्रेट के प्रभावी रूप से बंद रहने के बाद, सऊदी अरब ने तेल निर्यात को लाल सागर तक पहुंचाने के लिए ही अपनी पूर्व-पश्चिम पाइपलाइन का रुख़ भी किया।
फिर इस साल की शुरुआत में सऊदी अरब अपनी खाड़ी से होने वाली कच्चे तेल की कुल निर्यात में से 70% तक तेल पाइपलाइन के ज़रिए ही लाल सागर स्थित यानबू बंदरगाह भेज भी रहा था।
और इस पाइपलाइन के ज़रिए सऊदी अरब एशिया को तेल भेजने में सफल रहा है। फिर इसके लिए तेल लाल सागर के दक्षिणी हिस्से से होकर बाब अल-मंदेब स्ट्रेट के रास्ते भी जाता है।
और अब हूती विद्रोहियों के उस द्वीप तक पहुंचने की ख़बरों के बाद, इसका असर सऊदी अरब के तेल निर्यात पर पड़ सकता है।
फिर हूतियों का कहना है कि सऊदी अरब के जहाजों के अलावा वे अंतरराष्ट्रीय शिपिंग के लिए कोई खतरा भी नहीं हैं।
फिर इससे पहले सूत्रों के हवाले से ये भी बताया कि सरकारी सेनाएं मयून द्वीप से पीछे भी हट गई हैं।
और मयून द्वीप, जिसे कई बार बाब अल-मंदेब द्वीप भी कहा जाता है, इस स्ट्रेट के मध्य में ही स्थित है। और यह बाब अल-मंदेब दो जलमार्गों में ही बांटता है।
ये भी बताया है कि कुछ घंटे पहले यह ख़बर आई थी कि यमन का तटीय शहर धुबाब भी हूती लड़ाकों के हाथ में आ गया है।
और जिससे सऊदी अरब के तेल निर्यात के लिए महत्वपूर्ण बाब अल-मंदेब स्ट्रेट पर उनका लगभग पूरा नियंत्रण भी हो गया है। फिर ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों का उत्तरी यमन के बड़े हिस्से पर नियंत्रण है।
और उसने पिछले सप्ताह सऊदी अरब समर्थित यमनी सरकारी सेना के ख़िलाफ़ ही एक बड़ा हमला भी शुरू किया। फिर ईरान समर्थक हूती विद्रोहियों ने यमन में रेड सी के मोखा पोर्ट पर क़ब्ज़ा भी कर लिया है।