kanpur news : किराए के कमरों में नोट कारखाना, प्रिंटर से छापे 10 लाख के नकली नोट

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कानपुर में नकली नोटों का खेल अब पकड़ा गया। और फिर पांचवीं पास मास्टरमाइंड ने किराए के कमरों को ही ‘नोट छापने के कारखाने’ में बदल दिया।

गिरोह चार महीने में लाखों रुपये की नकली करेंसी तैयार कर चुका था। पुलिस ने तीन आरोपितों को गिरफ्तार कर 2.04 लाख रुपये के नकली नोट बरामद किए हैं।

इतना ही नहीं नकली नोट छापकर बाजार में चलाने वाले गिरोह के तीन लोग पकड़े गए हैं।

फिर उनके पास 2,04,650 रुपये के नकली नोट, प्रिंटर व नोट छापने के लिए जुटाई गई पेपरशीट मिली है।

उन्होंने चार माह में 50, 100, 500 के 10 लाख से अधिक के नकली नोट छापे। इन्हें कानपुर व आसपास जिलों के शराब ठेकों, रेलवे स्टेशन के पास ज्यादा चलने वाली दुकानों व सब्जी की दुकानों में खपाया गया।

और फिर वह नोट चलाने के लिए 10 हजार की कीमत के नकली नोट तीन हजार में देते थे। गिरोह 500 के नोट कम छापता था, क्योंकि उसे लोग बारीकी से जांचते हैं।

फिर नोट छापने का तरीका सिखाने वाला चौथा आरोपित फरार है, जिसकी लोकेशन राजस्थान के एक जिले में मिली है। टीम उसकी तलाश में निकली है।

साथ ही अपर पुलिस आयुक्त मुख्यालय-अपराध संकल्प शर्मा ने बताया कि रेलबाजार क्षेत्र में नकली नोट छापने की जानकारी मिली थी।

और गुरुवार को रामलीला मैदान के पास से एडीसीपी आपरेशन सुधाकर रामटेके की टीम ने उरई के गडर बिनौरा निवासी सोमिल गुप्ता, उन्नाव के बांगरमऊ रघुवरखेड़ा निवासी शेर बहादुर उर्फ शेर सिंह और बलरामपुर के बलरामपुर खलवा निवासी रोशन अली को भी पकड़ा।

इसके अलावा सरगना शेर बहादुर वर्तमान में चकेरी के संजू पुलिया में रहता था। फिर उसने बताया कि वह ट्रेनों में चोरी करता था।

इसी दौरान उसकी मुलाकात सोमिल और रोशन से हुई। तीनों मिलकर चोरी के साथ ही गांजा बेचने लगे।

ट्रेन में ही उनकी मुलाकात एक अन्य युवक से हुई। उसने बताया कि वह विशेष तरह की पेपरशीट पर प्रिंटर से नकली नोट छापता है और फुटकर कराने के बहाने चला देता है।

फिर योजना अच्छी लगी तो सबने अलग-अलग जगहों पर किराये के कमरे लिए और वहीं कलर प्रिंटर के जरिये 50, 100 और 500 रुपये के असली नोट को स्कैन कर नकली नोट छापने लगे।

और वे लोग हर महीने कमरा बदल देते थे, जिससे किसी को शक न हो। कुछ दिन पहले तीन लाख रुपये फिर छापे गए, इसमें कुछ रुपये खपा दिए गए, जबकि बाकी बचे 2,04,650 के नकली नोटों के साथ वे लोग पकड़े गए।

फिर इसमें 100 रुपये के 1991, 50 के 71 और 500 के चार नोट हैं। और आरोपितों पर रेल बाजार थाने में मुकदमा दर्ज किया गया।

फिर रेल बाजार से नकली नोट छापने वाले पकड़े गए गिरोह के तीनों आरोपित पांचवी और आठवीं पास निकले, लेकिन नकली नोट इतनी सफाई से इस तरह से छापते थे कि उसे देख जल्दी कोई पकड़ नहीं पाता था।

और सरगना शेर बहादुर सिंह गिरोह से जुड़े दो लोगों को 10 हजार रुपये के नकली नोट देकर तीन हजार रुपये के असली नोट ले लेता था।

फिर पुलिस की नजर में न सकें, इसलिए गिरोह हर महीने छपाई के लिए लिया अपना ठिकाना बदल देते थे।

और यहां तक वे लोग रात बिताने के लिए रैन बसेरा और रेलवे स्टेशन में चले जाते थे। फिर पुलिस अब इनके गिरोह के अन्य साथियों की तलाश में जुटी है।

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