Durga Ashtami 2023: नवरात्र का आठवां दिन मां महागौरी को समर्पित, तपस्या में बैठीं मां को गंगा जी ने किया था साफ, जानें पूजा विधि

Shardiya Navratri 2023: रविवार को मां के आठवें स्वरूप मां महागौरी की पूजा अर्चना होगी। इस दिन भक्त क्न्याओं को भोज भी कराते हैं।

0
451
रविवार को भक्त मां के आठवें स्वरूप मां महागौरी की पूजा करेंगे।

न्यूजलिंक हिंदी, डेस्क। Durga Ashtami 2023: शारदीय नवरात्र का रविवार को आठवां दिन है। यह दिन बेहद खास माना जाता है। मां दुर्गा के नौ स्वरूपों के बीच आठवें दिन भक्त मां महागौरी की पूजा कर मनोकामना मांगते हैं। कहते हैं कि विधि विधान से पूजा करने से मां खुश होती हैं, और अपने भक्तों की मुरादें पूरी करती है।

मां दुर्गा के आठवें स्वरूप महागौरी को मोगरे का फूल अति प्रिय है। ऐसे में मां के भक्तों को नवरात्र के आठवें दिन मां के चरणों में इस फूल को अर्पित करना चाहिए। इसके साथ ही मां को नारियल की बर्फी और लड्डू अवश्य चढ़ाएं। क्योंकि मां का प्रिय भोग नारियल माना गया है।

ये भी पढ़ें: कौन हैं महुआ मोइत्रा, क्या है Cash for Query विवाद? जानिए आखिर क्या है पूरा मामला

मां महागौरी की सही पूजा विधि
नवरात्रि पूजा के आठवें दिन की शुरुआत भगवान गणेश का आह्वान करके करें और उनका आशीर्वाद लें। फिर निम्न मंत्र बोलकर और आरती करके देवी महागौरी का आह्वान करें।

महागौरी की पूजा का शुभ मुहूर्त
मां महागौरी की पूजा का शुभ मुहूर्त शाम 7:02 से 9:07 तक रहेगा। मां महागौरी की पूजा से साधक को सुख-सौभाग्य और सौंदर्य का वरदान प्राप्त होता है।

मां महागौरी से जुड़े रोचक तथ्य
दुर्गा अष्टमी के दिन माता के महागौरी रूप की पूजा करते हैं। इस दिन महागौरी की पूजा का विशेष महत्व माना जाता है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, भोलेनाथ को पाने के लिए मां महागौरी ने सालों तक कड़ी तपस्या की थी। इस घोर तप में मां गौरी धूल-मिट्टी से ढंक गयी थीं। इसके बाद शिव जी ने स्वयं अपनी जटाओं से बहती गंगा से मां के इस रूप को साफ किया था। माता के रूप की इस कांति को शिवजी ने पुनर्स्थापित किया इसी कारण उनका नाम महागौरी पड़ा।

‘महागौरी आरती’

”जय महागौरी जगत की माया ।
जय उमा भवानी जय महामाया ॥
हरिद्वार कनखल के पासा ।
महागौरी तेरा वहा निवास ॥
चंदेर्काली और ममता अम्बे
जय शक्ति जय जय मां जगदम्बे ॥
भीमा देवी विमला माता
कोशकी देवी जग विखियाता ॥
हिमाचल के घर गोरी रूप तेरा
महाकाली दुर्गा है स्वरूप तेरा ॥
सती ‘सत’ हवं कुंड मै था जलाया
उसी धुएं ने रूप काली बनाया ॥
बना धर्म सिंह जो सवारी मै आया
तो शंकर ने त्रिशूल अपना दिखाया ॥
तभी मां ने महागौरी नाम पाया
शरण आने वाले का संकट मिटाया ॥
शनिवार को तेरी पूजा जो करता
माँ बिगड़ा हुआ काम उसका सुधरता ॥
‘चमन’ बोलो तो सोच तुम क्या रहे हो
महागौरी माँ तेरी हरदम ही जय हो” ॥

ये भी पढ़ें: आस्था का केंद्र बना कानपुर का सूखा “कुआं” ग्रामीणों का मानना कि भगवान भोलेनाथ पर जल चढ़ाने के लिए माँ गंगा हुई धरती पर प्रकट

Note: धार्मिक मान्यताओं और ग्रंथों से ली गई जानकारी के अनुसार यह महज सूचना है।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here