गंगा एक्सप्रेस-वे को विश्वस्तरीय बनाने के लिए स्विस आधारित अत्याधुनिक तकनीक का उपयोग किया जा रहा है। योगी सरकार ने इसको लेकर स्विट्जरलैंड के ज्यूरिख की ईटीएच यूनिवर्सिटी और आरटीडीटी लैबोरेट्रीज एजी के साथ करार किया है। इसके तहत आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस (एआई) और सेंसर आधारित तकनीक से रोड की गुणवत्ता सुनिश्चित की जा रही है। यह तकनीक निर्माण के दौरान ही खामियों को पकड़ने और उसको सुधारने का काम करेगी।
सेंसर-आधारित डिवाइस और डाटा कलेक्शन उपकरण रोड की गुणवत्ता का रियल-टाइम विश्लेषण कर रहे हैं। जिससे यह तुरंत पता चल जाता है कि सड़क का कौन सा हिस्सा मानकों पर खरा नहीं उतर रहा। निर्माण के दौरान ही इन कमियों को सुधारने से बाद में मेंटेनेंस की लागत और चुनौतियां कम होंगी। यूपीडा के एसीईओ श्रीहरि प्रताप शाही ने बताया कि गंगा एक्सप्रेसवे की राइडिंग क्वॉलिटी और कम्फर्ट को सुनिश्चित करने के लिए स्विस तकनीक का उपयोग किया जा रहा है।
अतीक अहमद का राजदार असाद कालिया कासगंज जेल में शिफ्ट, उमेश पाल हत्याकांड में भी था शामिल
”गंगा एक्सप्रेस-वे UP का चौथा ऐसा एक्सप्रेस-वे है, जिसमें हवाई पट्टी है। यह रात में लैंडिंग की क्षमता वाला देश का पहला एक्सप्रेस-वे है। गंगा एक्सप्रेस-वे 36,230 करोड़ रुपए की लागत से बनाया जा रहा है। यह 594 किलोमीटर लंबा है, जो मेरठ से प्रयागराज तक बन रहा है। इसे राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए लिए भी अहम पहलू माना जा रहा है।”
इसके तहत वायब्रेशन टेक्नोलॉजी और 7 एक्सेलेरोमीटर सेंसर (4 क्वॉलिटी और 3 कम्फर्ट के लिए) से लैस इनोवा वाहन सभी 6 लेन की जांच कर रहा है। यह वाहन रोड की सतह, कम्फर्ट लेवल और उतार-चढ़ाव का डाटा एकत्र करता है,जिसे ऑनलाइन ग्राफ के रूप में देखा जा सकता है। उन्होंने बताया कि पहले सड़क निर्माण के बाद क्वॉलिटी की जांच होती थी, जिससे मैन्युफैक्चरिंग डिफेक्ट को ठीक करना मुश्किल होता था। गंगा एक्सप्रेसवे पर स्विस तकनीक के जरिए निर्माण के दौरान ही रोड की क्वालिटी और कम्फर्ट की निगरानी हो रही है।
आईआईटी कानपुर ने तैयार किया अर्बन फ्लड रिस्पांस सिस्टम, बाढ़ आने से पहले देगा चेतावनी

