अमेरिका और ईरान के बीच हुआ तनाव खत्म होने का नाम नहीं ले रहा है। और फिर राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के साथ युद्धविराम भले ही बढ़ा दिया हो।
लेकिन हालात अभी भी चिंताजनक बने हुए हैं, फिर जिसकी वजह होर्मुज की नाकाबंदी है। और फिर ट्रंप ने साफ कहा है कि नाकाबंदी जारी रखेगा।
और फिर इस बीच मिडिल- ईस्ट में एक अजीब और गंभीर स्थिति बन गई है। और फिर एक तरफ दुनिया के कई हिस्सों में तेल की कमी और ऊंची कीमतें परेशानी का सबब भी बनी हुई हैं।
तो दूसरी तरफ ईरान के पास इतना तेल हो गया है कि उसे रखने की जगह भी कम पड़ रही है।
दरअसल अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के आदेश के अमेरिकी नेवी ने होर्मुज स्ट्रेट में कड़ी नाकेबंदी भी की हुई है।
जिससे ईरान के तेल के टैंकर कहीं आ जा नहीं सकते। और फिर ऐसे में हालात यहां तक पहुंच गए हैं कि ईरान का सबसे बड़ा संसाधन यानी उसका तेल अब उसके लिए ही बोझ बनता जा रहा है।
और फिर इतना ही नहीं अमेरिकी सेंट्रल कमांड के मुताबिक ईरानी बंदरगाहों की ओर आने-जाने वाले जहाजों पर कड़ी निगरानी है।
और मिली खबर के मुताबिक अब तक 34 से ज़्यादा जहाजों को रास्ता बदलने पर मजबूर भी किया गया है। फिर साथ ही 200 से ज़्यादा लड़ाकू विमान और हजारों सैनिक मौजूद हैं।
और फिर ईरान पर लगे प्रतिबंधों के बावजूद जंग से पहले ईरानी तेल चीन और कई दूसरे देशों को निर्यात भी हो रहा था लेकिन अभी अमेरिकी निगरानी में यह संभव भी नहीं हो पा रहा है।
इसके वाबजूद ईरान में अगर तेल रखने की जगह पूरी तरह खत्म हो गई, तो उसे मजबूरी में अपने तेल के कुएँ बंद भी करने पड़ेंगे।
और फिर यह बहुत गंभीर बात है। फिर एक बार अगर कुएं लंबे समय के लिए बंद हो गए फिर उन तेल के कुओं से फिर उत्पादन पूरी तरह वापस नहीं आ पाता।
यानी हमेशा हमेशा के लिए तेल के कुओं का नुक़सान भी हो जाएगा। फिर इससे लाखों बैरल प्रतिदिन की उत्पादन क्षमता भी खत्म हो सकती है।
यानी यह सिर्फ आज का नुकसान नहीं, बल्कि आने वाले कई सालों का झटका भी हो सकता है। और फिर इससे ईरान की अर्थव्यस्था पर भी असर पड़ेगा।