न्यूज़लिंक हिंदी। झारखंड में जमीन घोटाले से जुड़े मामले में ईडी की ओर से हेमंत सोरेन को गिरफ्तार किया गया था। इसकी वजह से उन्होंने मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया था। जिसके बाद आज यानी 2 फरवरी को झारखंड के नए मुख्यमंत्री के तौर पर चंपई सोरेन शपथ लेने वाले हैं। राज्यपाल सी. पी. राधाकृष्णन की तरफ से उन्हें शपथ लेने के लिए आमंत्रित किया गया है।

इतने बजे शपथ लेंगे चंपई सोरेन
अधिकारियों ने बताया कि शपथ ग्रहण समारोह आज सवा बारह बजे राजभवन के दरबाल हॉल में होगा। चंपई सोरेन को राज्यपाल सीपी राधाकृष्णन ने गुरुवार को मुख्यमंत्री मनोनीत किया था। इससे पहले चंपई सोरेन ने कहा था, ‘‘हम एकजुट हैं। हमारा गठबंधन मजबूत है, इसे कोई तोड़ नहीं सकता।’’
दो मंत्रियों के साथ चंपई सोरेन की शपथ
गौरतलब है कि ईडी द्वारा गिरफ्तार किए जाने के बाद हेमंत सोरेन ने बुधवार की रात करीब साढ़े आठ बजे सीएम पद से इस्तीफा दिया था। इसके तुरंत बाद चंपई सोरेन ने 43 विधायकों के हस्ताक्षर वाला पत्र राज्यपाल को सौंपकर सरकार बनाने का दावा पेश किया था। उन्होंने कहा था कि हमें कुल 47 विधायकों का समर्थन हासिल है। राज्यपाल की ओर से इसपर फैसले में विलंब होने पर गुरुवार को चंपई सोरेन ने शाम साढ़े पांच बजे राज्यपाल से मुलाकात कर एक बार फिर सरकार बनाने का दावा पेश किया और उनसे आग्रह किया कि उन्हें सीएम पद की शपथ दिलाई जाए। इसके बाद देर रात राजभवन की ओर से चंपई सोरन को बुलावा आया और उन्हें सीएम के तौर पर मनोनयन का पत्र सौंपा गया।
चंपई सोरेने का राजनीतिक करियर
चंपई सोरेन सरायकेला सीट से 1991 में पहली बार विधायक चुने गए थे। ये चुनाव उन्होंने बतौर निर्दलीय उम्मीदवार लड़ा था। चार साल बाद उन्होंने झारखंड मुक्ति मोर्चा के टिकट पर चुनाव लड़ा और बीजेपी पंचू टुडू को हराया। साल 2000 के विधानसभा चुनाव में हार गए। 2005 में फिर जीत हासिल की। जीत का अंतर 880 वोट था। 2009, 2014 और 2019 में उन्होंने जीत हासिल की। जब 2019 में हेमंत सोरेन की राज्य में सरकार बनी तो उन्हें खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति और परिवहन मंत्री बनाये गए। उन्हें हेमंत सोरेन का बेहद करीबी माना जाता है। शिबू सोरेन को चंपई सोरेन अपना राजनीतिक आदर्श मानते हैं।
कैसे झारखंड टाइगर बने चंपई सोरेन
चंपई सोरेन का ताल्लुक बेहद साधारण परिवार से रहा। वो अपने पिता के साथ खेती किया करते थे। झारखंड राज्य के लिए चली मुहिम में उन्होंने बढ़चढ़कर हिस्सा लिया। लोग उनके योगदान के लिए ‘झारखंड टाइगर’ के नाम से बुलाने लगे।

