Kanpur News : गोशाला चौराहा का 137 साल पुराना गोसेवा का इतिहास, आज भी शहर के नक्शे में नाम

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कानपुर का गोशाला चौराहा शहर की उस जीवंत स्मृति का नाम है, जहां कभी गोसेवा केवल कर्म नहीं, बल्कि सामाजिक संस्कार थी।

और फिर वर्ष 1888 में शुरू हुई यह यात्रा जूही की गोशाला के साथ शहर की आत्मा से जुड़ गई।

दान, सेवा और समर्पण से पली यह परंपरा समय के साथ शहरी विस्तार में खो गई। और फिर गोशाला चौराहा आज भी नाम के सहारे उस इतिहास की याद दिलाता है, जहां विकास के साथ संवेदना का संरक्षण भी जरूरी है।

cजूही गोशाला चौराहा आज भी 137 साल पुराने अपने नाम और इतिहास के जरिये शहर को सामाजिक व सांस्कृतिक अतीत से जोड़ता है।

इसके साथ ही गोसेवा के लिए वर्ष 1888 में काहू कोठी निवासी समाजसेवी सरजू प्रसाद पांडेय ने गौक्षणीय सोसायटी का गठन किया।

फिर उस दौर में जब पशु संरक्षण संगठित रूप में नहीं था, तब यह पहल समाज के लिए मिसाल बनी थी।

और फिर सोसायटी द्वारा पहली गोशाला रानीघाट क्षेत्र में संचालित की गई, जहां निराश्रित और बेसहारा गोवंश की देखभाल की जाने लगी। फिर समय के साथ गोसेवा का यह कार्य विस्तार लेता गया।

इसके अलावा जूही में गोशाला का संचालन शुरू हुआ तो धीरे-धीरे यह स्थान गोशाला चौराहा कहलाने लगा और यही नाम शहर के नक्शे में दर्ज हो गया।

फिर उस समय यह क्षेत्र शांत, हरियाली से घिरा और गोसेवा गतिविधियों से गुलजार रहता था।

और फिर आसपास के लोग गोशाला से जुड़े कार्यों में बढ़-चढ़कर भाग लेते थे। देश की आजादी तक, यानी वर्ष 1947 तक गोशाला का संचालन जूही में ही होता रहा।

हालांकि, आजादी के बाद तेजी से बढ़ती आबादी और शहरी विस्तार ने गोशाला के संचालन में बाधा उत्पन्न की।

फिर उसी वर्ष गोशाला को जूही से हटाकर भौंती के प्रतापपुर में स्थानांतरित कर दिया गया।

इसके साथ ही जूही क्षेत्र में गौसेवा की गतिविधियां समाप्त हो गईं, लेकिन गोशाला चौराहे का नाम इतिहास की याद के रूप में कायम भी रह गया।

और फिर आज स्थिति यह है कि गोशाला सोसायटी के नाम 1500 बीघे से अधिक भूमि दर्ज है।

फिर वर्तमान में जमीन का केवल बाजार मूल्य लगभग 67 अरब रुपये से अधिक का है। जहां कभी गोवंश की सेवा और संरक्षण होता था, वहां दुकानें, बाजार और व्यावसायिक प्रतिष्ठान संचालित हो रहे हैं।

और फिर गोशाला की जमीन का बड़ा हिस्सा व्यावसायिक उपयोग में आ चुका है। नई पीढ़ी के लिए गोशाला चौराहा सिर्फ एक ट्रैफिक प्वाइंट है, जबकि इसके पीछे छिपा इतिहास धीरे-धीरे धुंधला भी होता जा रहा है।

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