कानपुर की स्थिति अब इन दिन-ब-दिन बिगड़ती जा रही है। गड्ढों और उखड़ी सड़कों के कारण शहर का मजाक उड़ाया जा रहा है।
और इंटरनेट मीडिया पर शहर की सड़कों की तस्वीरें गड्ढों में तब्दील हो चुकी हैं। फिर उड़ती धूल ने शहर की हवा को जहरीला बना दिया है, जिससे नागरिकों को सांस लेने में कठिनाई भी हो रही है।
और गंदगी का फैलाव भी इस समस्या को और बढ़ा रहा है। साथ ही वायु स्वच्छता रैंकिंग में कानपुर पिछले साल पांचवे स्थान पर था, लेकिन अब यह 11वें स्थान पर पहुंच गया है।
फिर इसके बावजूद, सरकार ने शहर को 50 आदर्श स्वच्छ शहरों की सूची में शामिल नहीं किया है।
हालांकि, कानपुर स्मार्ट शहरों की सूची में शामिल है, लेकिन खतरनाक सड़कों की स्थिति यह दर्शाती है कि शहर के साथ सौतेला व्यवहार भी किया जा रहा है।
फिर अभी शहर की स्थिति गंभीर है। उड़ती धूल और फैली गंदगी ने नागरिकों के स्वास्थ्य को खतरे में डाल दिया है।
और खुदी सड़कें रात में दृश्यता को कम कर रही हैं, जिससे दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ गया है।
फिर स्वच्छ भारत अभियान के तहत आवास और शहरी मामलों के मंत्रालय ने उत्तर प्रदेश के आगरा, अयोध्या, लखनऊ, मथुरा, प्रयागराज और वाराणसी को आदर्श शहरों के रूप में चुना है, लेकिन कानपुर को इस सूची में स्थान भी नहीं मिला है।
फिर यह स्थिति तब है जब शहर को सुधार की आवश्यकता है। गंदगी और उड़ती धूल अब एक गंभीर खतरा बन चुकी है, जो न केवल पर्यावरण के लिए, बल्कि नागरिकों के स्वास्थ्य के लिए भी खतरनाक है।
और फिर स्वच्छता सर्वेक्षण रैंकिंग में अभी शहर देश में जरूर 13 वें स्थान पर है लेकिन हालत देखकर नजर भी नहीं आता है।