दिल्ली हाई कोर्ट ने अब बुधवार को 2020 के उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगों से जुड़े बड़े साज़िश मामले में जेएनयू के पूर्व छात्र उमर ख़ालिद और शरजील इमाम की ज़मानत याचिकाएं भी ख़ारिज कर दीं।
और फिर जस्टिस प्रतिभा एम. सिंह और जस्टिस दिनेश भट्ट की दो सदस्यीय बेंच ने यह आदेश भी दिया।
फिर बार एंड बेंच के मुताबिक़, कोर्ट ने कहा,सुप्रीम कोर्ट ने जनवरी 2026 में ख़ालिद और इमाम को ज़मानत देने से इनकार भी कर दिया था।
साथ ही कहा था कि वे एक साल बाद या गवाहों की गवाही पूरी होने के बाद ही फिर से ज़मानत मांग सकते हैं। और अभी दोनों में से कोई भी शर्त भी पूरी नहीं हुई है।
फिर कोर्ट ने कहा, इन मामलों के सभी तथ्यों को देखते हुए, ख़ास तौर पर गुलफ़िशा फ़ातिमा मामले में सुप्रीम कोर्ट की ओर से ही लगाई गई शर्तों के मद्देनज़र, यह अदालत ट्रायल कोर्ट के आदेश में कोई ग़लती भी नहीं पाती।और इसलिए, मौजूदा अपीलें ख़ारिज भी की जाती हैं।
फिर लाइव लॉ के अनुसार, ये अपीलें राष्ट्रीय जांच एजेंसी क़ानून की धारा 21 के तहत ट्रायल कोर्ट के 4 जुलाई के उस आदेश के ख़िलाफ़ ही दायर की गई थीं, फिर जिसमें ख़ालिद और इमाम को जमानत देने से इनकार भी कर दिया गया था।
और ट्रायल कोर्ट ने ये भी कहा था कि उसके पास सुप्रीम कोर्ट के उस फ़ैसले का पालन भी करने के अलावा कोई विकल्प नहीं है, फिर जिसमें दोनों को जमानत देने से इनकार भी किया गया था।